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Sunday 20th of May 2018 | Film review : अंग्रेजी में कहते है

Film review : अंग्रेजी में कहते है .....


डायरेक्टर – हरीश व्यास

मूवी टाइप – फैमली ड्रामा

रेटिंग – 3.0

कहानी - वाराणसी में रहने वाले यशवंत बत्रा ( संजय मिश्र) और किरण बत्रा ( एकवली खन्ना) पिछले 25 साल से विवाहित है| यशवंत बत्रा सरकारी नौकरी करते है  जिनका मानना है की मर्द का काम है बहार जाकर कमाना और औरत का काम है घर संभालना| यशवंत और किरण की एक बेटी है प्रीती ( शिवानी रघुवंशी) जो पड़ोस के लड़के जुगनू ( अंशुमान झा) से प्यार करती और अपने पिता के परम्परावादी सोच के खिलाफ जाके जुगनू से मंदिर में छुपकर के शादी कर लेती है| 25 साल के लम्बे वैवाहिक जीवन में यशवंत बत्रा ने एक बार भी अपनी पत्नी किरण से दो मीठे बोल नहीं बोले | उनकी बेटी प्रीती के इस कदम के बाद उन दोनों के बीच दूरियां बढ़ जाती है और एक दिन के झगड़े में वह अपनी पत्नी से कह देते है की जिस तरह प्रीती ने अपनी मनमर्जी की है तुम भी उसे छोड़के जा सकती हो | इस बात से दुखी होकर किरण अपने मायके चली जाती है | इसी बीच कहानी में दो नए किरदारों की एन्ट्री होती है , फ़िरोज़ ( पंकज त्रिपाठी) और सुमन ( इप्शिता चक्रवर्ती) . दोनों ने धर्म और जाती के बन्धनों को तोड़कर शादी की है | सुमन एक जानलेवा बीमार से जूझते हुये अस्पताल  में भर्ती है | किरण के घर छोड़ जाने के बाद प्रीती और जुगनू यशवंत को एहसास दिलाते है की 25 साल के वैवाहिक जीवन में कभी उन्होंने अपनी पत्नी से दो मीठे बोल तक नही बोले | फ़िरोज़ और सुमन के निश्चल प्यार को देखकर भी यशवंत सबक लेता है और उसे अपनी गलती का एहसास होता है | क्या अब यशवंत किरण से माफ़ी मागेगा ?  किरण यशवंत के साथ वापस अपने घर आती है या नहीं ये जानने के लिय आपको मूवी देखनी होगी | 

निर्देशन -  निर्देशक हरीश व्यास ने मध्यमवर्गी परंपरा और मर्दवादी सोच को बखूबी दर्शाया है |

एक्टिंग - संजय मिश्र ने हमेशा की तरह अपने रोल को इमानदारी से निभाया है | एकवली खन्ना ने भी अपने किरदार को बखूबी निभाया है | ओनीर – आदिल  और रंजन शर्मा के संगीत ‘ मेरी आँखे’ और ‘पिया मोसे रूठ गए’ आपको पसंद आएगा | जो लोग प्रेम – कहानियों  और अलग तरह के विषयों के शौक़ीन है यह फिल्म देख सकते है |


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