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फिर मिले तीन कुपोषित बच्चे

फिर मिले तीन कुपोषित बच्चे, दो की मौत एक की हातल है गंभीर


प्रदेश सरकार कुपोषण पीड़ित बच्चों के लिए नित नई नई योजनायें चला रही है तथा उन बच्चों के इलाज का वादा कर रही है लेकिन प्रदेश में आए दिन बच्चें कुपोषण की चपेट में आ रहे हैं और सरकार तो सिर्फ आपने वादे और दावे तक ही काम कर पा रही है लेकिन उसमें भी कुपोषित बच्चों के परिवार वालों को समझा पाने में प्रशासन कमजोर साबित हो रहा है.

ताजा मामला आया है ग्लालियर जिले के मलगढ़ा थाना क्षेत्र में बसी आदिवासी बस्ती का जहां डेढ़ महीने पहले कुपोषण के शिकार मिले तीन बच्चों में से दो की इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई जबकि एक की हालत गंभीर है हालाकि अब बच्चें के माता-पिता उसे अस्पताल में भर्ती कराने को तैयार नहीं हैं. लेकिन प्रशासन अभी तक उस मासूम बच्चे के परिजनों को समझाने की कोशिश में जुटा है.

शनिवार को महिला बाल विकास की टीम के साथ तहसीलदार भूपेंद्र सिंह कुशवाह, एसडीएम दीपशिखा भगत और पुलिस बस्ती में पहुंची थीं. परंतु बच्चे के माता-पिता उसे अस्पताल ले जाने पर राजी नहीं हुए बच्चे का नाम वंश (10 माह) पुत्र नरेंद्र आदिवासी है नरेंद्र का कहना है कि अस्पताल ले जाने से बच्चों की मौत हो जाती है जबकि उसकी पत्नी गिरिजा का कहना है कि जब तक पति नहीं कहेंगे, वह बच्चे को कहीं नहीं ले जाएगी दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक समझाने में नाकाम रहे अफसर मौके से लौट आए.

मलगढ़ा बस्ती में डेढ़ माह पहले विभाग की टीम गई थी तीन बच्चे अतिकुपोषित, कुपोषित मिले थे इनमें से दो विवेक और राधिका की इलाज के दौरान मौत हो गई वहीं तीसरा बच्चा वंश गंभीर है.

तहसीलदार भूपेंद्र सिंह कुशवाह ने बताया कि वंश के पिता नरेंद्र और मां गिरिजा महिला बाल विकास की टीम की समझाइश के बाद उसके इलाज के लिए तैयार नहीं हुए इसके बाद पुलिस बुलाई थी वे फिर भी बच्चे को भर्ती कराने को तैयार नहीं हैं तहसीलदार का कहना है कि रविवार को पुन: वह परिजनों को समझाने के लिए जायेगें तथा बच्चे को अस्पताल में भर्ती करायेंगे.

 


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