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पदोन्नति में आरक्षण को लेकर जाना पडेगा सुप्रीम कोर्ट

पदोन्नति में आरक्षण को लेकर फिर जाना पडेगा सुप्रीम कोर्ट


सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण की सशर्त अनुमति देकर केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है, लेकिन मप्र के अधिकारियों और कर्मचारियों को फिलहाल ये राहत नहीं मिल पाएगी इसके लिए राज्य सरकार को फिर से सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ेगा विधि विशेषज्ञ कहते हैं कि केंद्रीय कर्मचारियों के परिप्रेक्ष्य में सुप्रीम कोर्ट ने प्रकरण विशेष में अंतरिम आदेश दिया है, जो राज्यों पर लागू नहीं होता है यदि गाइडिंग प्रिंसिपल ऑर्डर होता तो राज्य सरकार पदोन्नति करने के लिए स्वतंत्र होती.

मप्र सहित चार राज्यों में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं चुनावी बिसात बिछने से ठीक पहले केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को पदोन्नति का तोहफा देने सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई कोर्ट ने इस मामले में मंगलवार को अंतिम फैसला आने तक पदोन्नति जारी रखने के आदेश दिए हैं इससे प्रदेश के कर्मचारियों में भी खुशी की लहर दौड़ गई दो साल से कर्मचारी सशर्त पदोन्नति की मांग कर रहे थे सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से इसके रास्ते खुल गए हैं. बतादें सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अंतिम फैसले के अधीन पदोन्नति देने को कहा है.

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2016 को 'मप्र लोक सेवा (पदोन्नति ) अधिनियम 2002" खारिज किया है तब से अब तक 55 हजार से ज्यादा कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं इनमें करीब 22 हजार कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी पदोन्नति के लिए डीपीसी हो चुकी थी या डीपीसी की तैयारी चल रही थी हर माह दो हजार से ज्यादा कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं.


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