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Monday 2nd of July 2018 | राष्ट्रसेवा से कोई मतलब नहीं, लग्जरी जीवन जी रहे लोग

आईएएस नें अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल


मध्य प्रदेश की सीनियर आईएएस अधिकारी  1994 बैच की दीपाली रस्तोगी ने अंग्रेजी अखबार में  लिखे लेख में सीनियर आईएएस अधिकारियों की कार्यशैली  को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होने लिखा है कि अच्छा आईएएस अधिकारी वही माना जाता है जो नेता की इच्छा के अनुरूप काम करें। इतना ही नहीं बगैर राजनीति आका के बोलने से पहले ही उसकी इच्छा जान ले, उसके अमल के लिये तैयार हो जाता है। दीपाली का यह भी कहना है कि नेताओं के डर से ऐसे अधिकारी मुंह नहीं खोलते। अधिकारियों का अपना कोई मत नहीं होता,होता भी है तो वे अपने मन में रखते हैं | सेवा करने के लिए बने आईएएस सेवा का व्यवहार ही नहीं करते। लोग हमारा सम्मान सिर्फ इसलिए करते हैं क्योंकि हमारे पास नुकसान और फायदा पहुंचाने की ताकत होती है।लेटरल एंट्री के सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि नेताओं को खुश करने उनके हिसाब से काम करने ,झूठ और सच को सही और गलत में अंतर खत्म करने के मूल विचार खत्म हो गए हैं। दीपाली पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान पर सवाल उठा चुकी है। उनके पति मनीष रस्तोगी, जो खुद सीनियर आईएएस है, कुछ दिन पहले ही ई-टेंडरिंग टेंपरिंग घोटाले को उजागर करने को लेकर चर्चाओं में हैं | 

 

केंद्र सरकार की योजना की आलोचना करने के चलते महिला आईएएस दीपाली रस्तोगी पर कार्रवाई किए जाने की तैयारी है | सचिव स्तर की अधिकारी के इस बर्ताव को सर्विस रूल्स के खिलाफ बताया जा रहा है | एमपी के मुख्य सचिव बीपी सिंह ने कहा कि वे इस मामले की जांच खुद करेंगे इसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा |
दीपाली के इस बर्ताव को आचरण संहिता की कंडिका-7 का उलंघन बताया जा रहा है | इसके तहत कोई भी लोकसेवक सरकारी नीति, कार्यक्रम के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आलोचना नहीं कर सकता है | सामान्य प्रशासन विभाग की सचिव रश्मि अरुण शमी का कहना है कि पूरे मामले का परीक्षण कराया जा रहा है| दीपाली फिलहाल आदिवासी विकास आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं | मामला मीडिया में आने के बाद से आईएएस दीपाली ने कुछ भी बयान देने से मना  कर दिया है | 


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