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प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हुआ शहर का संस्कृत महाविद्यालय

प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हुआ शहर का संस्कृत महाविद्यालय


रीवा । शहर के बिछिया मोहल्ले में संचालित संस्कृति महाविद्यालय पिछले कई सालों  से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो रहा है, मूलभूत सुविधाओं से वंचित यह महाविद्यालय सरकार के दावों की पोल खोल रहा है.जहाँ एक ओर देशभर में स्वक्षता अभियान चल रह वहीं दूसरी ओर इस महाविद्यालय  में  शौचालय तक की व्यवस्था नहीं की गई है.

दरअसल बिछिया स्थित जगन्नाथ मंदिर के प्रांगड़ में संचालित संस्कृत महाविद्यालय वर्ष 1955 से लगातार संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहा है. लेकिन अब यह महाविद्यालय लचर प्रसासनिक लापरवाही के कारण उपेक्षा का शिकार होता जा रहा है. एक ओर जहां सरकार के द्वारा देश भर में स्वस्छता का नारा दिया जा रहा है वहीं दूसरी ओर आज के इस दौर में भी महाविद्यालय के अंदर शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. महाविद्यालय का भवन भी क्षतिग्रस्त हो चुका है.

विंध्य 24 से बात करते हुए महाविद्यालय के प्रचार्य ने बताया कि 150 छात्रों से भरे इस महाविद्यालय में हर वक्त छत गिरने का डर बना रहता. दूर-दराज से पढ़ने आने वाले छात्रों के लिए महाविद्यालय में शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है. महाविद्यालय के प्रचार्य ने बताया कि कालेज की नवीनीकरण व मूलभूत सुविधाओं को पूरा कराने के लिए कई बार प्रसासन स्तर तक बात की गई है लेकिन फिर भी कोई कार्यवाई नहीं की जा रही है .


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