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फीस के लिए निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन की छूट

निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन की छूट, फीस नहीं जमा करने पर निकाल सकता है स्कूल प्रबंधन


मध्यप्रदेश की निजी स्कूलों को पढ़ रहे ऐसे छात्र जो स्कूल की फीस देने में असमर्थ हैं उनके लिए बुरी खबर हैं क्यों कि डीईओ ने निजी स्कूलों को छूट दे दी है कि अगर नियमित समय में फीस जमा ना हो तो छात्रों को स्कूल से निकाल सकते हैं. दरअसल इन दिनों होशंगाबाद जिले में जिला शिक्षा अधिकारी का फरमान चर्चा में है. अधिकारी ने नये शैक्षणिक सत्र के लिये प्रायवेट स्कूलों एवं छात्र-छात्राओं के पालको के लिये दिशा निर्देश जारी किये हैं. जिसमें कहा गया है कि अगर पालकों की अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने की क्षमता ना हो तो एडमिशन ना कराएं. अगर वे एडमिशन कराते है तो फीस समय पर भरनी होगी और अगर फीस नहीं भरी तो उनके बच्चों के नाम काट दिए जाएंगें. इतना ही नही इसमे कहा गया है कि प्रायवेट स्कूलो में दाखिला करने से पहले पालक अपनी आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन कर लें. हैरानी की बात तो ये है कि निजी संचालकों की मनमानी को अब शिक्षा विभाग का भी साथ मिल गया है. इन निर्देशों का बाकायदा प्रेसनोट भी जारी हुआ है.

निजी स्कूलों के पक्ष में डीईओ अनिल वैद्य ने यह निर्देश जारी किये हैं. जिसमें कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन नियमित फीस ले. फीस का भुगतान नहीं होने की स्थिति में न तो छात्र को परीक्षा से वंचित किया जाए और न ही टीसी रोकी जाए. ऐसा करने पर शिकायत हुई तो प्राइवेट स्कूलों पर मान्यता नियमों से कार्रवाई होगी. स्कूल प्रबंधन साल के अंत में फीस लेते हैं. पालक इकट्ठी फीस नहीं दे पाते तो बच्चों को परीक्षा से वंचित किया जाता है और रिजल्ट और टीसी रोक ली जाती है. ऐसे में अभिभावक विभाग और जनसुनवाई में शिकायत दर्ज करते हैं. इससे सभी को परेशानी होती है. डीईओ अनिल वैद्य ने आदेश में कहा कि शिक्षा संहिता के पृष्ठ 500 के नियम 54 पर उल्लेख है कि किसी स्टूडेंट की लगातार अनुपस्थिति और फीस का भुगतान नहीं होने पर होने पर स्कूल से स्टूडेंट का नाम काटा जा सकेगा. ऐसी स्थिति में स्कूल प्रबंधन को दो सप्ताह पहले अभिभावकों को सूचना देना होगी.

कमजोर आर्थिक स्थिति वाले पालकों को अधिकारी ने सलाह भी दी है है कि अपने बच्चों के दाखिले निशुल्क शिक्षा प्रावधान वाले शासकीय स्कूलों में कराये. यदि पालक अशासकीय स्कूलों में बच्चे का एडमिशन कराते हैं तो अशासकीय विद्यालय से फीस के संबंध में पहले ही स्पष्ट बात करें. दाखिले के पहले अपनी आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन करें. अशासकीय स्कूल भी पालक से छात्र के प्रवेश के समय ही फीस के विषय में स्पष्ट बात करें.


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