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Thursday 12th of July 2018 | मुस्लिम महिलाओं को नही मिलेगा भरण पोषण खर्च !

मुस्लिम महिलाओं को पति से भरण पोषण खर्च पाने का अधिकार नही : हाईकोर्ट


 

 

रीवा.  जबलपुर हाई कोर्ट के द्वारा मुस्लिम महिला के कानूनी अधिकारों के विषय में एक बड़ा फैसला लिया गया है, कोर्ट के जजमेंट में कहा गया है की मुसिलम महिलाओं को हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत पति से भरण पोषण खर्च पाने का अधिकार नही है, दरअसल रीवा जिले के सिरमौर तहसील के रहने वाले मोहम्मद हसन की ओर से दायर याचिका में उनके पक्ष में फैसला लिया गया है, उनका कहना था की उनकी पत्नी कनीज फतिम उनसे अलग रह रही हैं

याचिकाकर्ता ने दाम्पत्य संबंधों की पुनस्र्थापना के लिए सिविल कोर्ट सिरमौर में एक परिवाद दायर किया। इस परिवाद के लंबित रहने के दौरान ही उसकी पत्नी क नीजा ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अदालत में आवेदन दायर किया। आवेदन में कहा गया कि याचिकाकर्ता उसे प्रताडि़त करता है। वह उसके साथ नहीं रहना चाहती। लिहाजा केस का निर्णय होने तक उसे अंतरिम भरण-पोषण खर्च दिलाया जाए। यह आवेदन कोर्ट ने 20 अगस्त 2016 कों मंजूर कर याचिकाकर्ता को आदेश दिए कि वह कनीजा को प्रतिमाह 2500 रुपए अंतरिम गुजारा भत्ता दे।

 

इसी आदेश को याचिका में चुनौती दी गई। तर्क दिया गया कि सिविल प्रक्रि या संहिता की धारा 151 का यह उल्लंघन है। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 125 के तहत अंतरिम भरण-पोषण के आदेश केवल हिंदू विवाह अधिनियम के तहत दायर मामले में ही दिए जा सकते हैं। जबकि यह मामला मुस्लिम विवाह से संबंधित है। इस तर्क से कोर्ट ने सहमति जताई। हाईकोर्ट ने पति की याचिका स्वीकार कर निचली अदालत का आदेश निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि मुस्लिम महिला को हिंदू मैरिज एक्ट के तहत भरण-पोषण पाने का अधिकार नहीं है।


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