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Thursday 21st of September 2017 | टीवी पत्रकार की चाकू घोंप कर हत्या

टीवी पत्रकार की चाकू घोंप कर हत्या


अगलतरा। पश्चिमी त्रिपुरा जिले में  बुद्धवार को इंडिजीनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा के आंदोलन को कवर कर रहे एक लोकल टीवी चैनल में काम करने वाले पत्रकार शांतनु भौमिक की  हत्या कर दी गई।  पुलिस अधीक्षक अभिजीत सप्तर्षि ने बताया कि 'दिनरात' न्यूज चैनल के पत्रकार शांतनु भौमिक मंडई में आईपीएफटी के सड़क जाम और आंदोलन को कवर रहे थे । उसी दौरान उन पर पीछे से हमला किया गया और उनका अपहरण कर लिया गया । उन्होंने बताया कि बाद में भौमिक का पता लगा और उनके शरीर पर चाकू से हमले के कई निशान मिले । उन्हें तत्काल अगरतला मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया । त्रिपुरा के स्वास्थ्य मंत्री बादल चौधरी ने उनकी हत्या की निंदा की । राज्य के सूचना मंत्री भानूलाल साहा अस्पताल गए।  पुलिस अधिकारी ने बताया कि मंडई में स्थिति तनावपूर्ण है और क्षेत्र में पहले से ही धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गयी है। इसे अलावा वहां अतिरिक्त पुलिस बल की भी  तैनाती की गई हैं। 
आप को बता दें कि सीपीएम के जनजातीय प्रकोष्ठ गण मुक्ति परिषद के करीब 100 कार्यकर्ता अगरतला से करीब 40 किलोमीटर दूर खोवै जिले के छनखोला क्षेत्र में आईपीएफटी के साथ झड़प में घायल हो गए थे । इसके बाद इलाके में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई थी ।


लगातार पत्रकारों को बनाया जा रहा है निशाना : 
दुनियाभर में 2016 में 122 पत्रकार और मीडियाकर्मी मारे गए । भारत में 14 फरवरी को जन संदेश टाइम्स के ब्यूरो चीफ तरण मिश्रा की हत्या कर दी गई। एक स्थानीय चैनल के पत्रकार इंद्रदेव यादव की 16 मई को हत्या कर दी गई। दैनिक हिंदुस्तान के ब्यूरो चीफ राजदेव रंजन की 13 मई को, जय हिंद के ब्यूरो चीफ किशोर दवे की 22 अगस्त को और दैनिक भास्कर के पत्रकार धर्मेंद्र सिंह की हत्या 12 नवंबर को हुई। भारत में साल 2015 में निशाना बनाकर किए गए हमलों में छह मीडियाकर्मी मारे गए थे। इनमें ‘आज तक’ चैनल और दैनिक जागरण के पत्रकार भी शामिल थे।

हाल ही में, 5 सितंबर 2017 को बेंगलूर की पत्रकार गौरी लंकेश की गोली मार कर हत्या कर दी गई । लंकेश पर 5 सितंबर, 2017 को हमलावरों ने सात गोलियां दागी थी। चार गोलियां चूक गई, जबकि दो सीने पर और एक माथे पर लगी थी। जिससे उनकी मौत हो गई।  गौरी लंकेश कन्नड़ टैब्लॉइड अखबार ‘गौरी लंकेश’ की संपादक और हिंदू राइट-विंग विचारधारा और संगठनों की आलोचक थीं। नवीनतम उपलब्ध राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक, इस घटना के साथ ही पिछले दो वर्षों में देश भर में पत्रकारों पर 142 खतरनाक हमलों के मामले दर्ज हुए हैं।
एक गैर लाभकारी संस्था, कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नालिस्ट के मुताबिक, पिछले 24 वर्षों से 2016 तक कम से कम 70 पत्रकार मारे गए हैं। एनसीआरबी ने 2014 से पत्रकारों पर हमले के आंकड़ों को इकट्ठा करना शुरू किया है, जिसके  मुताबिक पत्रकारों पर हमले और हत्या के कुल मिलाकर 142 मामलों दर्ज किए गए है । जिसमें 2014 में 114 और 2015 में 28 मामले दर्ज किए गए है।  इस संबंध में सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए हैं। उत्तर प्रदेश में दो साल में 64 मामले दर्ज किए गए, लेकिन केवल चार लोगों को गिरफ्तार किया गया । उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश में (26) और बिहार में (22) पत्रकारों पर हमले के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। देश भर में हुए पत्रकारों पर हमलों में, इन तीन राज्यों की 79 फीसदी की हिस्सेदारी है। ऐसे मामलों में सर्वाधिक 42 गिरफ्तारी मध्यप्रदेश में हुई है। वर्ष 2014 में 10 और 2015 में 32 गिरफ्तारी की सूचना दी गई है।
 


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