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अदिवासी दिवस मात्र 20 जिलों को

अदिवासी दिवस मात्र 20 जिलों को 31 को कुछ नहीं


चुनावी साल में तो प्रत्येक सरकार की चाह होती है कि उसके मतदाता उसके कार्यकाल से खुश दिखें भले ही पिछले चार साल उसने कोई अच्छा काम ना किया हो लेकिन पांचवें साल वह ऐसी सौगातें दे देती हैं कि पिछले चार साल की भरपाई चुनाव के नजदीक आते ही पूरी हो जाती है.

ऐसा ही कुछ अब मध्यप्रदेश में भी देखने को मिल रहा है जहां वर्तमान सरकार अपने मतदाताओं को रिझाने के लिए नित-नए सौगात देती जा रहा है. जी हां हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के शिवराज सरकार की इनके द्वारा पिछले छ:महिनों में लगभग सभी वर्गों को खुश करने की कोशिश की गई एक ओर जहां समस्त कर्मचारी वर्ग तो वहीं दूसरी ओर समुदाय व जाति विशेष को नई नई योजनाओं क तहत लाभ देकर उन्हे प्रसन्न करने की कोशिश की गई है. इसी कड़ी में अब सरकार के द्वारा आदिवासी आंदोलन के बाद 9 अगस्त को अदिवासी दिवस पर छुट्टी का फरमान भी जारी कर दिया गया है. चलों कोई बात नहीं सारा दिन काम करने के बाद एक दिन का रेस्ट तो हर व्यक्ति को जरूरी होता है लेकिन यहां पर कुछ मेरे समझ नहीं आया कि प्रदेश में सिर्फ 20 जिले भाई क्या उनकों बस ही छुट्टी चाहिए सिर्फ उन्ही जिलों के लोग काम करते हैं या फिर बस उन्ही जिलों के लोग शिवराज जी को वोट करते हैं और सभी 31 जिलों के आदिवासी पक्के विपक्षी हो चले हैं.

यहां पर हम आपकों बताते चलें कि प्रदेश सरकार का यह फरमान मात्र 20 जिलों के लिए ही जारी किया गया है बाकिं बचे 31 जिले में तो आदिवासी हैं ही नहीं और जो हैं भी तो वह कुछ जानते ही नहीं. मतलब साफ है कि अपने उन 20 जिलों में रहने वाले लोगों के हिसाब से वह जिसे कहेगें उसे वोट कर देगें.

आईये एक नजर डालते हैं उन जिलों में जिनकों छुट्टी की जरूरत पड़ गई और उनकी सरकार ने फरमान भी जारी कर दिया, उनके लिए

श्योपुर, रतलाम, अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी, धार, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, बैतूल, छिन्दवाड़ा, मंडला, बालाघाट, सिवनी, डिण्डोरी, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, सीधी और होशंगाबाद ,

यार और जिलों को जाने दो लेकिन रीवा और सतना को तो ध्यान दे देते कम से कम हम भी एक दिन की छुट्टी में घर पर आराम करते बांकी सब तो मोह माया है


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