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बिजली बिल माफी योजना पर लगी याचिका

सुप्रीम कोर्ट पहुंची बिजली बिल माफी योजना की याचिका


मध्यप्रदेश में बिजली बिल माफी और सरल बिजली योजना को चुनौती देने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है.  विगत 13 जुलाई को हाईकोर्ट ने यह कहते हुए इसमें दखल से इनकार कर दिया था कि इन योजनाओं से होने वाले नुकसान का मुद्दा सरकार और बिजली कंपनी के बीच का है इनमें वह कुछ नहीं बोल सकते जिसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया गया.

सरकार ने उक्त अधिनियम का उल्लंघन करते हुए पैसा जमा किए बिना ही योजना लागू कर दी. याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि ऐसे में बिजली कंपनियां नुकसान की भरपाई के लिए बिजली रेट बढ़ा सकती है और उसका भार आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. यह दलील भी दी गई कि प्रदेश में अगले साल चुनाव हैं और इसी का राजनीतिक लाभ पाने के लिए सरकार ने ये कदम उठाया है.

याचिका में बताया गया कि वर्ष 2003 में भी तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने बिजली बिल माफी योजना लागू की थी, लेकिन विद्युत मंडल के पास पैसा नहीं जमा कराया था. तब चीफ जस्टिस राजा रत्नम और जस्टिस दीपक मिश्रा की खंडपीठ ने सरकार को 100 करोड़ रुपए जमा कराने के निर्देश दिए थे.


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