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हैरान परेशान "समाजवादी" क्या कुछ और सोच रहें है नेता जी ?

हैरान परेशान "समाजवादी" क्या कुछ और सोच रहें है नेता जी ?


लखनऊ। समाजवादी पार्टी में इन दिनों फिर से अंदर द्वांद का माहौल बना हुआ है। पार्टी कार्यकर्ताओं की स्थिति ऐसी बनी हुई है कि समझ में नहीं आ रहा कहां जाना है और किसके पीछे खड़े होकर नारे लगाने है। अखिर उनका नेता है कौन ? वहीं खबरे आ रहीं है कि पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव अपने पुत्रमोह में भाई शिवपाल के सारे अरमानों में पानी सच में फेरने में लगे है या ये भी कोई राजनीतिक चाल है। सामजवादी पार्टी में इन दिनो जो चल रहा है। उससे यह कह पाना कि आखरी चाल किसकी होगी और वो चाल क्या होगी ? ये मुश्किल है, लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं है कि मुलायम सिंह यादव अपनी खांटी राजनीति का परिचया देते हुए पार्टी अपने बेटे के नाम कर के एक बाप का फर्ज भी सफाई से निभा जाएं और एक दूसरी पार्टी बनवा कर एक भाई का भी काम कर जाएं।
खैर जो होगा वो तो होगा ही, लेकिन इन दिनों खबरों में ये है कि मुलायम सिंह द्वारा सोमवार को समाजवादी पार्टी से अलग होकर नई पार्टी बनाने का एलान होना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।  शिवपाल मुलायम के जरिए अखिलेश यादव को राजनीति सिखाने की कवायद कर रहे थे, लेकिन नेताजी ने ऐसा सियासी दांव चला कि शिवपाल ही ठिकाने लग गए।  मुलायम सिंह यादव आज जब लोहिया प्रेस कांप्रेंस में पहुंचे तो उनके हांथ में कुछ दो-चार पन्ने के कागज थे । लेकिन नेजा जी ने जब उन कागजों को पड़ना शुरु किया तो बड़ी सफाई से पहले पन्ने को हटा दिया और बांकी के कागजों को एक के बाद एक पढ़ना शरु कर दिया। जबकी बगल में बैठे शारदा शुक्ल बार-बार पहले पेज को नेता जी को देने की कोशिश कर रहे थे । पर नेता जी तो नेता जी है करेंगे वही जो उनका मन करेगा। अखिरकार नेता जी ने उस पहले पन्ने को नहीं पढ़ा।   
सूत्रों की माने तो उस पहले पन्ने में नई पार्टी की बात लिखी हुई थी। जिसे नेता जी प्रेस कांफ्रेंस के जरिये बताने वाले थे। जिसे नेजा जी ने पढ़ा ही नहीं और उल्टा ये बताने लगे कि मै कोई नई पार्टी नहीं बना रहा हुं। प्रेस कांप्रेंस में एक पत्रकार ने नेता जी से ये सवाल किया कि अखिलेश यादव और शिवपाल यादव में से किसी एक को चुनना पढ़ा तो आप किसे चुनेंगे ? नेता जी ने पहले तो सवाल सुना फिर उसे अनसुना करते हुए सवाल को टाल दिया !


 


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