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Thursday 16th of August 2018 | कलेक्टर को रास नही आई छात्राओं की प्रस्तुती,लगा दी रोंक

कलेक्टर को रास नही आई छात्राओं की प्रस्तुती, नृत्य पर लगा दी रोंक, कांग्रेस ने बताया अफसरशाही


मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के लिए एक स्कूल की छात्राओं द्वारा तैयार किया गया नृत्य कलेक्टर को रास नहीं आया और उन्होने छात्राओं के इस डांस को बीच से ही कैंसिल कर दिया. यह सब सिर्फ इसलिए हुआ क्यूंकि लड़कियों द्वारा जिस गाने पर डांस किया जा रहा था, उसके बोल किसानों की दयनीय स्थिति और फसल बर्बादी को दर्शाता था, इस गाने पर आपत्ति दर्ज करते हुए कलेक्टर ने इसे कैंसिल करते हुए डांट भी लगा दी.

दरअसल, स्वतंत्रता दिवस के लिए स्कूलों में पहले से तैयारी चल रही थी, इसी तरह सरकारी एमएलबी स्कूल की छात्राओं को भी सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करना था, जिसकी रिहर्सल चल रही थी, इसी दौरान जैसे ही कलेक्टर, एसपी औऱ आला अफ़सरों ने ये डांस देखा तो पाबंदी का फरमान जारी कर दिया, छात्राओं की मानें तो कलेक्टर साहब ने हमें गांव का गंवार और लूजर कहते हुए प्रोग्राम को कैंसिल कर दिया. इससे आहत कुछ छात्राएं रो पड़ीं. छात्राएं जिस गाने पर नृत्य करने वाली थीं, उस गाने के बोल ऐसे थे जिसमें बारिश ना होने की वजह से फसल बर्बाद होने की व्यथा थी, कर्ज़ के बोझ से दबा किसान तंग आकर खुदकुशी कर लेता है. गाने की पंक्तियां कुछ ऐसी थीं, 'भगत सिंह जू फांसी चढ़े रे कर अपनो नाम अमर कर गए. दूसरी पंक्ति में था, अरि ऐ री सब सहो सूखा को संकट'

इस गीत -नृत्य पर रोक लगाने के बाद कांग्रेस ने सवाल उठाये हैं. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता केके मिश्रा ने इसको लेकर ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा है कि "15 अगस्त, पर इस वर्ष छतरपुर में बालिकाओं द्वारा गाये जाने वाला समूह गान में कलेक्टर ने रोका दी है जबकि सांस्कृतिक समिति ने इस गाने को उचित माना था बच्चे इ, गाने पर नृत्या ती प्रैक्टिस कई दिनों से कर रहे थे. गान में किसानों की आत्महत्या का जिक्र आने पर रोका गया जिससे लगता है कि चापलूस अफसरशाही लोकतंत्र को बेचकर ही दम लेगी"


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