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Saturday 18th of August 2018 | अटल बिहारी वाजपेयी विशेष !

अटल जी के निधन से आहत हुआ देश !


भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से पूरा देश आहत है, देश भर से लोगों के द्वारा उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया, देश ही नही बल्कि समूचे विश्व में उनके लिए आदर और सम्मान देखा जा रहा है|

अटल जी के निधन का दिनांक भी अब उनके चाहने वालों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है, क्यों की उनके निधन के एक दिन पूर्व देश में स्वतन्त्रता दिवस मनाया गया था और अगर उस दिन यह अनहोनी हो जाती तो, देश की शुभ घडी मातम में बदल जाती और देश का तिरंगा झुका दिया जाता | मगर ऐसा लग रहा है की मानो स्वयं अटल जी ने काल से लड़कर स्वतन्त्रता दिवस को तिरंगा न झुकने देने का फैसला लिया|

इस विषय में देश भर से अलग अलग प्रतिक्रियाएं आ रही है, एक प्रतिक्रिया कविता के रूप में प्रस्तुत है| जिसे लिखा है रीवा की सुहासिनी साठे जी ने -

 

आजादी का जश्न मना है, मौत अभी तुम रुक जाना

अभी तिरंगा लहराया है, आज नही तुम कल आना

 

माना तू अटल, सुनिश्चित, मै भी एक अटल हूँ ना ?

थोड़ी कर ले आज प्रतीक्षा, हूँ द्वार खड़ा तुम आ जाना

अभी तिरंगा लहराया है, आज नही तुम कल आना....

 

जल, थल, नभ में आज़ादी का उत्सव है, आनंद दिखे

भारत माँ श्रृंगार करें, बेड़ी उतरे मृदु चरण दिखे

मै मन की, आँखों से देखूं तुम मुझे देखते रुक जाना

अभी तिरंगा लहराया है, आज नही तुम कल आना....

 

झुका रहे क्यूँ ध्वज भारत का? सब मौन रहें मै न चाहूँ

मेरे देश का जन जन रोये, आँख अश्रु मै न चाहूँ

बस कल तक यह काल रुके, फिर साथ चलूँ तुम कल आना,

अभी तिरंगा लहराया है, आज नही तुम कल आना....

 

स्वाधीन दिवस की साल गिरह, स्वात्यंत्र किरण का उजियारा

है जन गन मन का अमृत स्वर, वो मातृगीत जग से न्यारा

कर लूं देश वन्दना जी भर हो तृप्त कर्ण, फिर तुम आना

अभी तिरंगा लहराया है, आज नही तुम कल आना....

 

तीन रंग में निद्रा अंतिम, भारत जननी की गोद मिले

तिलक भाल हो इस माटी का वंदन चन्दन स्वर मोद मिले

अंतिम साँसों तक राष्ट्रप्रेम की ज्योति जलाने आ जाना

अभी तिरंगा लहराया है, अभी नही तुम कल आना.....

 

- सुहासिनी साठे, रीवा

 

 


जिस पत्रकारिता का कभी स्वर्णिम युग ना था , उसमे स्वर्णिम व्यक्तित्व की तरह उ

अटल जी के निधन से आहत हुआ देश !


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