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Thursday 23rd of August 2018 | सियासत के शाश्वत प्रतिपक्ष 'कुलदीप नैयर'

जिस पत्रकारिता का कभी स्वर्णिम युग ना था , उसमे स्वर्णिम व्यक्तित्व की तरह उभरे कुलदीप नैयर


 

अपने शायराना अंदाज़ के लिए मशहूर फैज़ अहमद फैज़ सियालकोट के थे , और वहीँ के थे पत्रकारिता में हमेशा सियासत के शाश्वत प्रतिपक्ष रहने वाले दिवंगत पत्रकार कुलदीप नैयर . जो कि बाद में दिल्ली की पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका में रहे , और स्टेट्समैन नामक अखबार में संपादक के तौर में भी कार्यरत रहे .

खामोश बैठी पत्रकारिता में दिवंगत पत्रकार कुलदीप नैयर का चले जाना इसे और खामोश इसलिए बना देता है क्यूंकि वो हमेशा सत्ता से सवाल करने के पर्याय के तौर पर याद किये जायेंगें . और इस तरह के सवाल की आपातकाल के दौर में बिना किसी मुक़दमे के तब की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें जेल की यात्रा भी करवा दी थी.

पूर्व पत्रकार कुलदीप नैयर का तल्ख़ रवैया ऐसा था कि सत्ता पक्ष के हिमायती उनके साथ चाय की चुस्की लेने से पहले भी कई बार विचार किया करते थे , आज के दौर में इस शक्सियत जैसे पत्रकार आप उँगलियों में गिन सकते हो , जो पत्रकारिता को जीते हों और उनका पेशा ही उनका धर्म हो , सत्ता का प्रतिपक्ष बनना शायद ही आज के दौर का पत्रकार चाहता हो , इसीलिए कुलदीप नैयर का जाना पत्रकारिता को और खामोश कर गया .

एक सबसे खास बात कुलदीप नैयर के अन्दर थी कि वो उस दौर में भी पढ़े लिखे पत्रकार थे , जो कि आज के समय में भी देखने को कम ही मिलते हैं , उनके जीवन में पत्रकारिता का क्या महत्व था इसका अंदाज़ा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि पत्रकारिता की पढ़ाई करने वो अमेरिका गये थे , वहां काम किया , फीस की व्यवस्था की और जर्नलिज्म में डिग्री लेकर भारत वापस आये .

उर्दू पत्रकारिता से शुरुआत की उसके बाद  हिन्दुस्तान में अंग्रेज़ी  पत्रकारिता की तरफ रुख किया और इंडियन एक्सप्रेस ,स्टेट्समैन, जैसे प्रमुख अखबारों में काम करते हुए, इस पेशे की गरिमा को ध्यान में रखते हुए, पत्रकारिता के क्षेत्र में स्वर्णिम स्थान तक पहुंचे . और धीरे धीरे उन्होंने अपने आप को एक स्वतंत्र पत्रकार की तरह स्थापित किया, और उनकी स्वतंत्र पत्रकारिता अभी तक चली .

-गौरव सिंह

विन्ध्य टाइम्स


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