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Thursday 23rd of August 2018 | केरल में आई बाढ़ की असली वजह ?

केरल में आई महाप्रलय की असली वजह प्राकृतिक आपदा या कुदरत से खिलवाड़ का नतीजा ?


दक्षिण भारत के  सबसे समृद्ध राज्यों में से एक केरल को शायद एक महीने पहले इस बात का अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि इस बार का मानसून उसके लिए 'मौत की बारिश' लेकर आएगा, जो सदी के सबसे विनाशकारी बाढ़ में बदल जाएगी. केरल में आप जहां भी नजर धुमाएंगे तो हर तरफ आपको तबाही और सिर्फ तबाही ही दिखाई देगी. अबतक इस जलप्रलय में 350 से अधिक लोग अपनी जान गांव चुके हैं और करीब 12 लाख लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं. राज्य को करीब बीस  हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा की संपत्ति का नुकसान हुआ है.

  • राज्य सरकार के साथ केंद्र सरकार भी बचाव कार्य में जोरों शोरों से जुटी है. यही नहीं भारतीय सेना SDRF और NDRF के साथ बाढ़ ग्रस्त इलाकों में पेड़ों और छतों पर फंसे लोगों को बचाने के अभियान में जुटी हुई है.

भारत सरकार ने इस बाढ़ को "गंभीर प्रकृति की आपदा" की श्रेणी में रखा है लेकिन अभी इसे राष्ट्रीय आपदा  घोषित नहीं किया है, अगर ऐसा होता है तो राज्य को इस आपदा से लड़ने के लिए केंद्र की तरफ से ज्यादा धन मिलेगा.

लेकिन राज्य के सामने सिर्फ बाढ़ के पानी से लड़ने की चुनौती नहीं है. बल्कि उसे अब पानी से पनपने वाली बीमारियों की

रोकथाम करने की बड़ी चुनौती है. क्योंकि अस्थायी आवास और निरंतर बारिश से जानलेवा बीमारियां होने का खतरा बना हुआ है. प्रशासन की तरफ से पानी को स्वच्छ करने के लिए क्लोरीन पाउडर और शिविरों में जरूरी भोजन, कपड़ो को बांटा जा रहा है.

लेकिन सवाल ये उठता  है कि क्या इस प्राकृतिक आपदा को इतना विनाशकारी रूप लेने से रोका जा सकता था?

जून से सितंबर तक चलने वाले मानसून के बीच के दौर में ही इस बारिश ने अपना विनाशकारी रूप दिखाना शुरू कर दिया और सदी की सबसे भयावह बाढ़ में तब्दील हो गई. हालांकि इस बार सामान्य से 40 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है.

भारी वर्षा के कारण अधिकारियों को मजबूरन बांधों से पानी छोड़ना पड़ा ताकि उन्हें पानी के दबाव के चलते टूटने से बचाया जा सके..

यहां तक कि इतने कम समय में भारी बारिश होने के कारण नदियों में तेजी से भूस्खलन हुआ, जोकि बड़ी संख्या में लोगों की मौत का कारण बना गया.

कुछ पर्यावरणविद नें इस जलप्रलय के लिए वनों की कटाई को जिम्मेदार ठहराया. वहां कम समय में ज्यादा बारिश होने के कारण पहले भी तबाही मची है.

मानसून की बारिश बाढ़ में कब तब्दील हुई-

दरअसल जुलाई के आखिर से ही राज्य में बाढ़ जैसे हालात बनने शुरू हो गए थे. लेकिन 8 अगस्त के बाद भारी मॉनसून बारिश के कारण यह विनाशकारी बाढ़ में तब्दील हो गई.

हालांकि अब ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि राज्य में पानी के स्तर में गिरावट देखी गई है, लेकिन पूरे अगस्त महीने की बात करें तो औसतन बारिश से दुगनी बारिश हुई है.

राज्य के इतिहास में पहली बार, 42 में से 35 बांध खोले गए, जिसके परिणामस्वरूप ऐसा भयानक आपदा से पूरे केरल में हाहाकार मच गया.

पानी कम होने के साथ जो लोग राहत शिविरों से वापस अपने घर लौटना चाहते हैं उन्हें घर के आस- पास साफ- सफाई को लेकर मुश्किलों का सामना भी करना पड़ेगा.

अधिकारियों ने बताया कि इस बाढ़ के कारण कई लोगों घरों के अंदर 60 सेमी (24 इंच) तक मिट्टी हो सकती है.

 

 

नीरज चौहान

Journalist

Republic TV

Mumbai 


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