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Sunday 28th of October 2018 | कमलनाथ के सवालों पर बीजेपी का 'नो कमेंट्स'

कमलनाथ के सवालों का जबाव नही दे रही बीजेपी, आज पूछा गया 9 वाँ सवाल


 

15 वर्षों से वनवास झेल रही कांग्रेस इस बार सत्ता में वापसी के लिए पूरी कोशिश कर रही है। इसी बीच विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस लगातार बीजेपी को घेरने में लगी हुई है। कांग्रेस द्वारा मैदान के साथ साथ सोशल मीडिया पर सरकार का जमकर घेराव किया जा रहा है। इस बार चुनाव से पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने बीजेपी से सवाल करने की ठानी है, और रोजाना शिवराज सरकार ने नए नए सवाल पूछ रहे है। कमलनाथ के सवालों का आज नवां दिन है और ये सिलसिला 40 दिन तक चलने वाला है। कमलनाथ 40 दिन 40 सवा के माध्यम से 20 अक्टूबर से 28 नवंबर तक सरकार की नाकामी उजागर करेंगे।वही कांग्रेस के इन सवालों का जवाब देने के लिए भाजपा ने एक रणनीति बनाई है। भाजपा ने फैसला किया है कि वो कांग्रेस के किसी भी सवाल का जवाब नही देगी।

भाजपा का कहना है कि जिन सवालों को लेकर कांग्रेस सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, वे बेकार के है, क्योंकि पिछले दिनों ही पार्टी विज्ञापनों के माध्यम से जनता को आंकड़ों के साथ सारे सवालों के जवाब दे चुकी है, ऐसे में अब फिर से इन सवालों के जवाब देना जरुरी नही।हम जनता से सीधे संवाद कर रहे हैं और अब कमलनाथ खुद सवाल बन गए हैं। जनता को सब पता है और चुनाव में इसका नतीजा भी देखने को मिल जाएगा।

इसके साथ ही भाजपा का मानना है कि इससे जनता के बीच गलत संदेश जाएगा कि कांग्रेस चुनाव प्रचार में आगे चल रही है और भाजपा सिर्फ उसका जवाब देने में लगी हुई है, इसीलिए पार्टी ने कांग्रेस के इन प्रश्नों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देने का फैसला किया गया है।हालांकि अपनी मुहिम के पहले दिन स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार से सवाल किए थे, जिस पर स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह ने जवाब भी दिया, लेकिन इसके बाद करीब हफ्ते से कमलनाथ के किसी भी सवला का जवाब नही दिया गया है। वही भाजपा की इस रणनीति पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। कांग्रेस का कहना है कि जब सवालों के जवाब भाजपा के पास है ही नही तो कहां से देगी।

 

आज कमलनाथ ने पूछा ये सवाल

सवाल नंबर 9 -

मोदी सरकार ने दी अंदर की दर्दनाक ख़बर,

मामा ने किया लाखों आदिवासी भाइयों को 'घर-बदर' ।

मामा,आदिवासियों के सपनों को क्यों रौंदा ?

क्यों छीन लिया उनका घरौंदा ?

 

1) केंद्र की कांग्रेस सरकार ने 2006 में 10 करोड़ आदिवासी भाइयों को वनों में रहने और वनोपज से आजीविका का अधिकार सुनिश्चित किया ।

2) देश में सबसे ज़्यादा आदिवासी भाई मप्र में निवास करते हैं;और मप्र और छत्तीसगढ़ ,दो ऐसे भाजपा शासित राज्य हैं

जिन्होंने आदिवासियों के वनों में रहने के अधिकार को रौंदा।

3) मप्र में 6 लाख 63 हज़ार 424 आदिवासी परिवारों ने वन में निवास और सामुदायिक उपयोग के लिए मामा सरकार को आवेदन किया।

4) मामा ने निर्दयतापूर्वक 3 लाख 63 हज़ार 424 परिवारों के आवेदन को अवैधानिक तरीके से निरस्त कर दिया ।

लगभग 18 लाख़ आदिवासी भाइयों के सपनो को रौंद दिया ।

5)इसमें 1.54 लाख़ अनुसूचित जाति, पिछडा वर्ग के परिवारों ने भी दावे किये थे। उनमें से 1.50 लाख़ ,अर्थात 97.9% दावे ख़ारिज कर दिए गए। राज्य के 42 जिलों में इस श्रेणी के 100% दावे ख़ारिज किए गए ।

6)संसद द्वारा बनाये गए कानून के मुताबिक यह तय किया गया कि ग्राम वन समिति द्वारा दावों का सत्यापन करके, उन्हें स्वीकृत किया जाएगा।

फिर विकासखंड स्तरीय समिति उन्हें मान्यता देगी।

7) यहाँ ग्राम वन समिति, ग्राम सभा और विकासखण्ड स्तरीय समिति ने सभी दावों को मान्य किया ।

किन्तु इन सबके बावजूद शिवराज ने आदिवासी भाइयों के अधिकारो को निर्ममता पूर्वक रौंद दिया

8)गंभीर कुपोषण से प्रभावित कोल और मवासी आदिवासी बहुल जिले सतना में 8466दावो मे से 6398दावे,अर्थात 75.6%दावे निरस्त किए गए,सीधी मे 78%,उमरिया मे 63%,सिवनी में 67.4%,पन्ना में झाबुआ में 65.5%

9) व्यापक तौर पर वनाधिकार कानून के तहत अधिकतम 4 हेक्टेयर पर अधिकार देने का प्रावधान है,मगर मध्यप्रदेश में औसतन मात्र 1.4 हेक्टेयर पर यह अधिकार दिए गए ।

आदिवासी बहुल झाबुआ में 1 हेक्टेयर , अलीराजपुर में 1.2हेक्टेयर ,मंडला में 1.4 हेक्टेयर ,बालाघाट में 1.2हेक्टेयर ।

10) इसी प्रकार सीधी में औसतन 0.5 हेक्टेयर ,अनूपपुर में 0.7हेक्टेयर, शहडोल में0.3 हेक्टेयर, इत्यादि ।आश्चर्यजनक रूप से भोपाल आदिवासी जिला न होते हुए भी यहाँ औसतन 7.2 हेक्टेयर ज़मीन का अधिकार दिया गया ।

11) भोपाल में 7391 हेक्टेयर भूमि पर 1026 दावे स्वीकृत किये गए

इनमें से आदिवासी भाइयों के सिर्फ़ 210 दावे थे ।

- 40 दिन 40 सवाल -

मोदी सरकार के मुँह से जानिए

मामा सरकार की बदहाली का हाल।

"हार की कगार पर मामा सरकार"

 


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