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Tuesday 30th of October 2018 | चपरासी के अंडर में लगी प्रोफेसर की ड्यूटी !

चपरासी को बनाया पीठासीन अधिकारी, मचा हडकंप


मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को मतदान होना हैं। चुनाव आयोग ने सभी अफसरों के ड्यूटी के आदेश भी जारी कर दिए हैं। इनमें कॉलेज और विश्वविधालयों के प्रोफेसरों को भी ड्यूटी पर नियुक्त किया गया है। मजे की बात यह है कि ये प्रोफेसर एक ऐसे पीठासीन अधिकारी के अधीनस्थ काम करेंगे जो वर्ग चार का सफाईकर्मी है। जब इस बात की जानकारी मिली तो प्रोफेसर बिगड़ गए और विरोध शुरू कर दिया। यह जानकारी कुछ शिक्षकों ने मीडियो को दी है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश कॉलेज प्रोफेसर एसोसीएशन के अध्यक्ष कैलाश त्यागी ने बताया कि यह विचित्र परिस्थिती है किसी वर्ग चार के कर्मचारी को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है और वरिष्ठ प्रोफेसरों को उसके अधीनस्थ काम करने के लिए कहा गया है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकारी कॉलेज के एक दिव्यांग प्रोफेसर को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है। दिव्यांग प्रोफेसर ने बताया कि वह समझ नहीं पा रहे इस काम को किस तरह अंजाम देंगे।

यह है पीठासीन अधिकारी को नियुक्त करने का नियम

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि वर्ग तीन के किसी भी कर्मचारी को पीठासीन अधिकारी नियुक्त नहीं किया जा सकता। पीठासीन और पोलिंग अधिकारी वेतनमान, पद और रैंक के अनुसार वर्गीकृत होते हैं। नियम पुस्तिका के अनुसार गजेट अधिकारी को पीठासीन अधिकारी नियुक्त जाता है। अगर ऐसा करपाना संभव नहीं है तो फिर किसी समकक्ष रैंक वाले अधिकारी को पीठासीन अफसर नियुक्त किया जा सकता है। साथ ही पीठासीन अधिकारी वेतनमान और रैंक में पोलिंग अधिकारी से उच्च होना चाहिए।

एमपी कॉलेज प्रोफेसर एसोसीएशन ने इस मामले को लेकर कलेक्टर और राज्य चुनाव आयोग से रोस्टर में बदलाव का अनुरोध किया है। आयोग के लिखे पत्र में त्यागी ने कहा है कि 2013 में हाईकोर्ट ने कहा था कि सीनिर अफसर को किसी जूनीयर के अधिनस्थ नियुक्त नहीं किया जा सकता। यहां तो एक सफाईकर्मी को पीठासीन अफसर नियुक्त कर दिया गया है। जो सरासर गलत है।


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