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Monday 9th of October 2017 | गोधरा कांड

गुजरात 2002 गोधरा कांड, 15 साल बाद आया फैसला


अहमदाबाद। 2002 में गुजरात में हुए गोधरा कांड मामले पर गुजरात हाईकोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाया है। गुजरात हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए दंगे में शामिल 11 दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। इसके साथ दंगो में मारे गए 59 लोगों के परिवारों को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने की बात भी कही है । मार्च 2011 को इस मामले में 31 लोगों को दोषी करार दिया गया था, और 63 लोगों को बरी कर दिया गया था। साथ 11 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी, और 20 लोगों को उम्रकैद की सजा दी गई थी।  
गौरतलब है कि गोधरा रेलवे स्टेशन के पास साबरमती ट्रेन के एस-6 कोच में लगी आग में 59 कारसेवकों की मौत हो गयी थी। इस मामले में करीब 1500 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बताया जाता है कि इस ट्रेन में भीड़ ने पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी, जो गोधरा कांड की जांच कर रहे नानवती आयोग ने भी माना है। इसके बाद प्रदेश में सांप्रदायिक दंगा भड़का और उसमें 1200 से अधिक लोग मारे गये थे। आगजनी के मामले में कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था।
ट्रेन जलाने के मामले में गिरफ्तार किये गये लोगों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक अध्यादेश यानि पोटा लगाया गया। हालांकि, उसे बाद में हटा भी लिया गया था। दंगों के बाद सरकार ने ट्रेन में आग लगने और उसके बाद हुए दंगों की जांच करने के लिए एक आयोग नियुक्त किया था। जिसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षड़यंत्र का मामला दर्ज किया था। वर्ष 2003 में एक बार फिर आरोपियों के खिलाफ आतंकवाद संबंधी कानून लगा दिया गया। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कोई भी न्यायिक सुनवाई होने पर रोक लगा दी थी। साल 2004 में यूपीए ने सरकार बनायी और पोटा कानून को खत्म कर दिया था। जनवरी 2005 में जांच कर रही यूसी बनर्जी समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया कि एस-6 में लगी आग एक दुर्घटना थी। इस बात की आशंका को खारिज किया गया कि आग बाहरी तत्वों द्वारा लगायी गयी थी। 
वर्ष 2006 में गुजरात हाईकोर्ट ने यूसी बनर्जी समिति को अमान्य करार देते हुए उसकी रिपोर्ट को भी ठुकरा दिया, जिसमें कहा गया था कि आग सिर्फ एक दुर्घटना थी। उसके बाद 2008 में एक जांच आयोग बनाया गया और नानावटी आयोग को जांच सौंपी गयी, जिसमें कहा गया था कि आग दुर्घटना नहीं बल्कि एक साजिश थी। जनवरी 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले में न्यायिक कार्रवाई करने को लेकर लगायी रोक हटा ला गई। फरवरी 2011 में विशेष अदालत ने गोधरा कांड में 31 लोगों को दोषी पाया, जबकि 63 अन्य को बरी कर दिया था। 
मार्च 2011 में विशेष अदालत ने गोधरा कांड में 11 लोगों को फांसी, 20 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनायी। इसके बाद साल 2014 में नानावती आयोग ने 12 साल की जांच के बाद गुजरात दंगों पर अपनी अंतिम रिपोर्ट तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को सौंप दी गई थी। 
जिसके बाद अक्टूबर 2017 में मामले को लेकर कोई फैसला आया है। बतादें कि गुजरात हाईकोर्ट ने एसआईटी की विशेष अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिसके बाद आज ये फैसला सुनाया गया है। 


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