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Tuesday 8th of January 2019 | शिव बोले- सत्तापक्ष का रवैया अलोकतांत्रिक

मध्यप्रदेश विधानसभा में भाजपा का वॉकआउट, एनपी प्रजापति बने सदन के अध्यक्ष


मध्य प्रदेश विधानसभा का दूसरा दिन हंगामेदार रहा। विधायको के हंगामे के बीच स्पीकर का चुनाव संपन्न हुआ। जिसमें एनपी प्रजापति को सदन को संचालित कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई। सदन की कार्रवाई शुरू होते ही दो विधायक यशोधरा राजे सिंधिया और मालिनी गौड़ को प्रोटेम स्पीकर दीपक सक्सेना ने शपथ दिलाई। इसके बाद सत्ता पक्ष की ओर से एनपी प्रजापति को स्पीकर बनाए जाने का प्रस्ताव पेश किया गया। स्पीकर चुनने के लिए जैसे ही नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव भाजपा प्रत्याशी विजय शाह का प्रस्ताव पेश करने के लिए खुड़़े हुए तभी संसदीय कार्यमंत्री गोविंद सिंह ने आपत्ति लेते हुए कहा कि जो प्रस्ताव पहले आ चुका है सिर्फ उन्हें ही स्वीकार किया जाए। जिससे सदन में हंगामे शुरू हो गया। हंगामे के कारण प्रोटेम स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। दुबारा सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रोटेम स्पीकर ने बिना वोटिंग के ध्वनिमत के आधार पर एनपी प्रजापति को स्पीकर घोषित कर दिया गया। जिससे नाराज विपक्ष दल के विधायक वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। इसके बाद प्रोटेम स्पीकर ने वोटिंग की मांग करने के बाद मत विभाजन का ऐलान किया। इससे पहले भाजपा विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। भाजपा प्रोटेम स्पीकर द्वारा कांग्रेस के एनपी प्रजापति को बिना वोटिंग के विधानसभा अध्यक्ष घोषित करने का विरोध कर रही थी। वहीं, भाजपा वोटिंग के दौरान सदन से अनुपस्थित रही। आपको बता दें कि सत्ता पक्ष से अध्यक्ष उम्मीदवार एनपी प्रजापति को 120 मत मिले जबकि प्रोटेम स्पीकर होने के कारण दीपक सक्सेना वोट नहीं डाल सके। वहीं भाजपा ने विरोध करते हुए सदन के बाहर नारेबाजी की, वहीं एनपी प्रजापति ने पद ग्रहण कर लिया है।  जबकि विपक्षी दल की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे कार्य को इतिहास का काला दिन बताया साथ ही विपक्ष पैदल मार्च करते हुए राजभवन जाएगा, जहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को ज्ञापल सौंपा जाएगा। विरोध की विरोध की स्थिति को देखते हुए राजभवन के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। इससे पहले सत्ता पक्ष की ओर से डॉ. गोविंद सिंह, आरिफ अकील, विक्रम सिंह, वैजनाथ कुशवाह, पीसी शर्मा एवं ग्यारसीलाल रावत ने एनपी प्रजापित के  नाम का प्रस्ताव पेश किया। जब नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने स्पीकर के लिए प्रस्ताव पेश करने खड़े हुए तो संसदीय कार्यमंत्री ने आपत्ति ले ली। जिस पर विपक्ष के विधायक खड़े हो गए और नारेबाजी करने लगे। हंगामा बढऩे पर सदन की कार्यवाही 10 मिनटे के लिए स्थगित कर दी गई। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव समेत भाजपा के अन्य विधायक वेल में पहुंचकर हंगामा करने लगे। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा यह अलोकतांत्रिक और लोकतंत्र की हत्या है, इससे पहले खबरें आ रहीं थी कि भाजपा के उम्मीदवार वोटिंग से पहले अपना नाम वापस ले सकते हैं। नियम पांच के तहत मत विभाजन की जरूरत नहीं पड़ी और प्रोटेम स्पीकर ने वोटिंग कराने से इंकार कर दिया। माना जा रहा है कि अब कांग्रेस भाजपा का विधानसभा उपाध्यक्ष का पद दे सकती है।

मौजूद रहे कांग्रेसी दिग्गज :

स्पीकर के चुनाव के दौरान अध्यक्ष दीर्घा में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, सुरेश पचौरी एवं पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह मौजूद रहे।तीनों नेता सदन की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे। जब प्रोटेम स्पीकर ने सदन की कार्यवाही स्थगित की तब मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अध्यक्ष प्रवेश द्वारा से स्पीकर के कक्ष में जाकर चर्चा की। करीब 10 मिनट के तक रणनीति पर चर्चा हुई।

वोटिंग कराने की तैयारी में थी बीजेपी : भाजपा ने अध्यक्ष चुनाव के लिए वोटिंग की तैयारी कर ली थी। यही वजह थी कि वरिष्ठ विधायक करण सिंह वर्मा को विशेष तौर पर भोपाल बुलाया गया। वर्मा की धर्म पत्नी का कल ही निधन हो गया था। वहीं विधायक यशोधरा राजे सिंधिया विदेश जाने वाली थी, पार्टी ने उन्हें भी रोक लिया था।

बीजेपी बोली- कराए गुप्त मतदान : स्पीकर चुनाव प्रक्रिया से पहले भाजपा ने गुप्त मतदान की मांग की थी। जिसे विधानसभा में खारिज कर दिया गया। भाजपा ने इसका भी विरोध किया। सत्तापक्ष ने इसके जवाब में तर्क दिया था कि राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने ही ओवन वोटिंग की शुरूआत की थी।


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