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रीवा में बाथरूम में मिला एएसपी के चालक की पत्नी का शव, परिजनों ने लगाया दहेज हत्या का आरोप पुलिस ने शुरू की जांच। रीवा नगर निगम की स्कीम नंबर 6 की जमीन का मामला, नगर निगम के हाथ से निकल गई 99 एकड़ जमीन, रजिस्ट्री पर लगाई रोक। रीवा में फॉल्ट सुधारते वक्त चालू की गई बिजली,लाइनमैन की मौत विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के अनंतपुर की घटना। मप्र. में150 यूनिट तक बिजली खर्च तो बिल भी 150 रुपए, कैबिनेट में आज प्रस्ताव,70 लाख उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने की तैयारी में कमलनाथ सरकार। मप्र के सतना के अमरपाटन में अपहरण के बाद मासूम की हत्या, घुमाने के बहाने ले जाकर की हत्या फिर परिजनों के साथ तलाश में लगा रहा हत्यारा, चचेरे भाई ने ही दिया वारदात को अंजाम।
Thursday 10th of January 2019 | सवर्ण आरक्षण बिल को असंवैधानिक घोषित करने की मांग

असंवैधानिक है बिल, सवर्ण आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई याचिका


केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सरकार द्वारा 10 फीसदी आरक्षण देने का मामला संसद से तो पास हो गया है। लेकिन एक एनजीओ बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस बिल के खिलाफ सर्वोच्च न्यायलय में याचिका दायर की गई है। एनजीओ द्वारा दायर की गई याचिका में संशोधित बिल को असंवैधानिक बताया गया है। याचिका में कहा गया है कि आर्थिक रूप से आरक्षण देना गैर संवैधानिक है, इसलिए संशोधित बिल को निरस्त किया जाए। यूथ फॉर इक्वालिटी नामक एनजीओ ने याचिका में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण की सीमा 50 फीसदी तय की गई है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से आरक्षण देना गलत है और ये सिर्फ सामान्य श्रेणी के लोगों को नहीं दिया जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि गैर.अनुदान प्राप्त संस्थाओं को आरक्षण की श्रेणी में रखना गलत है। याचिका में अपील की गई है कि इस बिल को असंवैधानिक घोषित किया जाए। इसमें कहा गया है कि ये फैसला वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए किया गया है। गौरतलब है कि बुधवार को ही 10 घंटे की लंबी बहस के बाद राज्यसभा में संशोधित बिल पास हुआ है। ये बिल लोकसभा में पहले ही पास हो चुका है। अब इस बिल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। जिसके बाद यह कानून का रूप धारण कर लेगा। आपको बता दें कि सरकार के फैसले के बाद कई राजनीतिक दलों ने इस बिल को लाने की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा था। हालांकि, विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल को अपना समर्थन देकर पारित करा दिया। मालूम हो कि यूथ फॉर इक्वॉलिटी एक ऐसी संस्था है जिसे कई छात्र और प्रोफेशनल मिलकर चलाते हैं। इससे पहले भी ये निजी संगठन शिक्षा में सुधार, राजनीति में सुधार जैसे कई मसलों पर कैंपेन चला चुकी है। सरकार द्वारा पेश किए गए इस बिल में अभी तक जिन जातियों को आरक्षण नहीं मिलता था, वह इस आरक्षण की श्रेणी में आ गए हैं। हालांकि, उन्हें आर्थिक आधार पर सिर्फ 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस आरक्षण से अभी तक अनुसूचित जाति जन जाति व पिछड़े वर्ग को ही आरक्षण मिलता था। जिस पर इस आरक्षण का कोई असर नहीं पड़ेगा।


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