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Friday 11th of January 2019 | कर्जमाफी के मुद्दे पर शिवराज का कमलनाथ पर ट्वीट वार

शिव बोले- किसानों का वोट लेने के लिए सिर्फ ऋणमाफी का वादा, 25 दिन बाद भी नहीं हुआ पूरा


मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान सरकार बनने के दस दिन बाद कर्जमाफी के वादे के साथ पंद्रह वर्षों बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री लगातार घेरने में जुटी हुई है। इसी क्रम में शिवराज ने एक बार फिर कर्जमाफी के मुद्दे को लेकर कमलनाथ सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में सरकार बनने पर 10 दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी। कांग्रेस की सरकार बन गई, जिसे 10 दिन नहीं पूरे 25 दिन बीत गए। लेकिन व्यावहारिक रूप से किसान के कर्ज का एक नया पैसा माफ नहीं हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने ट्वीटर के जरिए कांग्रेस सरकार को निशाने पर लेते हुए एक नहीं कुल दस ट्वीट कर सवाल पूछे है। अपने ट्वीट में पूर्व सीएम ने कहा कि मैं प्रदेश सरकार से मांग करता हूं कि सभी किसानों का 2 लाख रुपए तक का लोन माफ करने के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान किया जाए और जो समर्थन मूल्य के नीचे बोनस व अतिरिक्त राशि देने का फैसला हमने किया था, उसे लागू कर किसानों को राहत दी जाए। उन्होंने कहा मप्र में 50 लाख से अधिक किसानों का 40 हजार करोड़ रूपये से अधिक कर्ज माफ होना है, लेकिन अनुपूरक बजट में केवल 5 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान है। मुख्यमंत्री रहते मैंने इसी वर्ष चार माह में फसल बीमा योजना के 52 सौ करोड़ और एक वर्ष में 32 हजार 700 करोड़ रूपये किसानों के खाते में डलवाए। उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार स्पष्ट करे कि 5 हजार करोड़ रुपये कितने लोगों को और कब दिए जाएंगे। 15 से 22 जनवरी तक फॉर्म भरवाए जाएंगे, किसी के खाते में पैसा नहीं आएगा। इतनी जटिलताएं पैदा कर दी गई हैं कि कई किसान अपात्र हो जाएंगे। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया है कि कर्जमाफी को मुश्किल बना रही प्रक्रियाओं को सरकार क्यों अपनाने में जुटी हुई है। इसके साथ ही शिवराज ने अन्य कई सवाल भी दागे।

किसान के खाते में सीधे पैसे डाले सरकार : शिवराज सिंह ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में राजनीतिक फायदे के लिये कर्जमाफी का अधिक प्रचार किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि 22 फरवरी से पैसा खाते में आएगा। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि फरवरी के अंत या मार्च के पहले सप्ताह में आचार संहिता लग जाएगी, फिर किसान के खाते में पैसा कैसे आएगा? मैं सीधे-सीधे कहना चाहता हूं, कोई आवेदन या फॉर्म भराने की जरूरत नहीं है। ऑन रिकॉर्ड है राष्ट्रीयकृत बैंकों की किस शाखा का कितने किसानों पर कितना बकाया है। सहकारी बैंकों के आंकड़े भी हैं, तो इधर-उधर की बात क्यों कर रहे हो, सीधे किसान के खाते में पैसा डालो। बैंकों को पैसा दे दो। शिवराज ने कहा कि कर्जमाफी के मुद्दे पर किसानों को उलझाया जा रहा है, इसलिए प्रदेश सरकार से मांग करता हूं कि सीधे किसान के खाते में या बैंकों में पैसा डालकर किसानों को कर्जमाफी का लाभ दिया जाए। शिवराज सिंह ने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री था असैा बीजेपी की सरकार थी, तो कांग्रेस ने कहा था कि किसानों को उपज का सही मूल्य देने के लिए मंडी में जिस भाव बिका उसके अलावा सोयाबीन पर 500 रुपए प्रति क्विंटल देंगे, मक्का पर हम 500 रुपए प्रति क्विंटल देंगे। उड़द समर्थन मूल्य से नीचे बिकेगा तो उसमें पैसे देने का हमने वचन दिया था। केवल वचन ही नहीं प्रावधान भी किया था। इतना ही नहीं गेहूं 2100 रुपए प्रति क्विंटल खरीदेंगे। आलू, प्याज व लहसुन हो हमने सभी फसलों पर तय किया था कि बोनस देकर हम किसानों को उपज का लाभकारी मूल्य दिलाएंगे। लेकिन सरकार किसानों से सिर्फ वोट लेने के लिए वादे कर रही है। 


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