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ओंकारेश्वर बांध विस्थापितों को मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत, कोर्ट ने सरकार को दिया आदेश विस्थापितों को उपलब्ध कराएं बेहतर भूमि। प्रदेश के भिंड में चार लोगों की हत्या करने वाले आरोपी को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा। शहडोल उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रही हिमाद्री सिंह ने आज कांग्रेस का हाथ छोड़ थामा भाजपा का दामन कमलनाथ सरकार को जबलपुर हाईकोर्ट से तगड़ा झटका, ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने पर लगाई रोक। टिकट को लेकर भाजपा में मचा घमासान, दावेदारों ने प्रदेश कार्यालय के सामने की नारेबाजी।
Friday 11th of January 2019 | पूर्व सीएम शिव, रमन व राजे को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी

तीनों राज गंवाने वालों की केंद्रीय राजनीति में एंट्री, लड़ेंगे लोकसभा का चुनाव


आगामी लोकसभा चुनाव को फतह करने के लिए भारतीय जनता पार्टी आज यानी शुक्रवार को राष्ट्रीय अधिवेशन कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसके अलावा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपने रणनीति के हिसाब से तैयारियों को लेकर कदम उठा रहे है। जिसमें उन्होंने तीन बड़े राज्यों में मिली हार और सत्ता गंवाने वाले पूर्व मुख्यमंत्रियों को पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। जिसमें मध्यप प्रदेश में तीन बार मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चैहान, राजस्थान में दो बार मुख्यमंत्री रही वसुंधरा राजे सिंधिया और छत्तीसगढ़ में तीन बार सरकार चलाने वाले रमन सिंह को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है। सूत्रों की मानें तो पार्टी शीर्ष नेतृृत्व ने तीनों नेताओं को साफ कर दिया कि उनके अनुभव मजबूत नेतृत्व के कारण पार्टी को उनकी जरूरत केंद्रीय राजनीति में है। उन्हें अब दिल्ली की राजनीति करनी होगी। शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे पहले भी संगठन में काम कर चुके हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी ने तय किया है कि शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश की विदिशा सीट से चुनाव लड़ेंगे। यहां से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सांसद हैं। विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान उन्होंने घोषणा की थी कि वो स्वास्थ्य कारणों से अगला चुनाव नहीं लड़ेंगी। आपको बता दें कि इस सीट से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और खुद शिवराज सिंह चौहान चुनाव लड़ चुके हैं। वसुंधरा राजे सिंधिया राजस्थान की झालावाड़ सीट से चुनाव लड़ेंगी। वर्तमान में यहां से उनके बेटे दुष्यंत सिंह सांसद हैं। वहीं, रमन सिंह छत्तीसगढ़ की राजनांदगांव सीट से चुनाव लड़ेंगे, जहां से उनके बेटे अभिषेक सिंह सांसद हैं। मतलब साफ है कि पार्टी लोकसभा चुनाव में किसी भी तरह का खतरा मोल लेना नहीं लेना चाहती है। इसलिए अपने सभी बड़े नेताओं को चुनावी महासमर में उतारकर चुनावी वैतरणी पार करना चाहती है। सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में हर रोज चौंकाने वाले फैसले पार्टी और सरकार की तरफ से सुनने को मिलेंगे। अमित शाह यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि हिंदी बेल्ट में बीजेपी के हाथ से 3 राज्य निकालना खतरे की घंटी है।


शिव का कांग्रेस पर हमला- कर्जमाफी का वादा किया है निभाना तो पड़ेगा, अन्यथा हमे

कांग्रेस पार्टी की स्क्रीनिंग बैठक आज, प्रदेश की 16 सीटों पर प्रत्याशियों के


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