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Friday 11th of January 2019 | सपा व बसपा के बीच हुआ समझौता

यूपी में गठबंधन से कांग्रेस बाहर, सपा व बसपा होंगे एक साथ


उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन फाइनल हो गया है। जिसका औपचारिक ऐलान शनिवार को 12 बजे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती एक साथ प्रेस कांफ्रेंस कर कर सकती है। दोनों पार्टियों के ऐलान के बाद स्पष्ट हो गया है कि गठबंधन से कांग्रेस पार्टी बाहर है। जिससे यह साफ हो गया है कि लोकसभा 2019 का चुनाव उत्तर प्रदेश में अब एक तरफ बीजेपी और दूसरी तरफ बुआ-बबुआ की जोड़ी होगी। जबकि कांग्रेस अलग से चुनाव लड़ेगी। आपको बता दें कि कभी दोनों पार्टियां एक दुसरे से छत्तीस का आंकड़ा रखने वाली समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पुराने सभी गिले शिकवे को भूल कर एक दूसरे का साथ देने को तैयार हो गई है। जबकि इन समझौतों के बीच दोनों दलों ने कांग्रेस को अपना बेहतर साथी न मानते हुए गठबंधन से अलग कर दिया है।  राजनीतिक पंडितों के मुताबिक दोनों पार्टियां गठबंधन के लिए इस लिए एक साथ आई है क्योंकि दोनों पार्टियों को प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2017 में करारी हार का सामना किया था। जिसमें कांग्रेस पार्टी को जहां 47 सीटें मिली थी। वहीं, बसपा को प्रदेश की 19 सीटों पर चुनाव जीत पाई थी। जिसके कारण दोनों पार्टियों को प्रदेश की बड़ी पार्टी भाजपा का सामना करने के लिए साथ आना पड़ा है।

2014 को दोहराने से बचना भी गठबंधन का कारण :  2014 में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के सामने विपक्ष की सभी कवायदे व तैयारियां धाराशायी हो गई थी। प्रदेश के 80 लोकसभा सीटों पर 2014 में बसपा एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। जबकि सपा में सिर्फ अपने कुनबे को ही बचा पाई थी। जिसमें अपने गढ़ कहे जाने वाले सीटों पर ही विजय हासिल कर सकी थी। 2019 में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए दोनों पार्टियों को एक साथ आने की जरूरत आन पड़ी है। जबकि सियासी गलियारे में चर्चा है कि दोनों पार्टियों ने प्रदेश में हुए उपचुनावों में एकसाथ चुनाव लड़कर गठबंधन की मजबूती व जनता के समर्थन को आंक लिया था। जिसमें दोनों पार्टियों ने भाजपा के गढ़ कहे जाने वाले लोकसभा सीट गोरखपुर सदर व फूलपुर की सीट पर जीत हासिल किया था। जिसके बाद दोनों दलों को गठबंधन का फार्मूला फीट बैठ गया। जबकि इसके अलावा राजनीति के जानकारों का मानना है कि प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की पतली हालत के बाद से दोनों पार्टियों ने गठबंधन में साथ नहीं लिया। वहीं, इसका एक और कारण भी माना जा रहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस व सपा ने एक साथ चुनाव लड़ा था। जिसमें कांग्रेस पार्टी सिर्फ सात सीटों पर आकर सिमट गई थी। जिसके बाद से सपा ने कांग्रेस को गठबंधन के दायरे से बाहर रखने का मन बना लिया था और कयास भी यही लगाए जा रहे कि सपा ने इसी कारण कांग्रेस को गठबंधन में शामिल नहीं किया है।

भविष्य बचाने के लिए भी गठबंधन : राजनीति के जानकारों के मुताबिक उत्तर प्रदेश की दोनों दलों को भविष्य का खतरा मंडराने लगा है। जिसको लेकर दोनों दलों को साथ आना पड़ा है। जानकारों का कहना है कि लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों को जो हस्र हुआ साथ ही विधानसभा चुनाव 2017 में दोनों दलों की शिकस्त ने विरोधी दलों को एक साथ खड़ा करने के लिए विवश कर दिया। वहीं, लोकसभा उपचुनाव में दोनों सीटों पर यदि पार्टी चुनाव हार जाती तो अस्तित्व व भविष्य समाप्त होने का खतरा मंडराने लगता। इन सभी स्थितियों को ध्यान में रखते हुए दोनों दलों ने एक साथ आने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही दोनों दलों के औपचारिक ऐलान के बाद वास्तिविक स्थितियां सामने आएंगी। हालांकि मध्यप्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को मिली अप्रत्याशित जीत ने संगठन को मजबूत किया है। जिससे कांग्रेस पार्टी उम्मीद कर रही है कि लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी। जिसके कारण कयास यही लगाए जा रहे कि कांग्रेस गठबंधन की ओर ज्यादा गंभीर नहीं दिख रही है।


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