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Saturday 12th of January 2019 | मंत्री न बनाए जाने से नाराज है सहयोगी विधायक

बगावती सुर को समाप्त करने के लिए मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकती है कमलनाथ सरकार


आगामी लोकसभा चुनाव से पूर्व मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार कैबिनेट में विस्तार कर सकती है। अन्य दलों के सहयोगियों के समर्थन से बनी सरकार के मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से सरकार के बीच मतभेद सामने आ रहा है। सरकार से असंतुष्टि को समाप्त करने के लिए कमलनाथ मंत्रिमंडल में विस्तार कर सकती है। जिसका औचपचारिक ऐलान राहुल गांधी के अनुमोदन व कमलनाथ के विदेश से वापस लौटने के बाद किया जाएगा। आपको बता दें कि विधानसभा सत्र के दौरान भी कई विधायकों ने खुलकर मंत्री मंडल में जगह दिए जाने के आश्वासन मिलने की बात कही थी। मुख्यमंत्री कमलनाथ दिल्ली दौर पर हैं, यहां वे राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वह विदेश यात्रा पर भी जाने वाले हैं। कमलनाथ 24 से 26 जनवरी तक दावोस में रहेंगे, संभावना है कि वहां से लौटने के बाद मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल में विस्तार करेंगे। इससे पहले वह राहुल गांधी से मिलकर असंतुष्टों को साधने की चर्चा कर सकते है।  प्रदेश की सियासत में चर्चाओं का माहौल तेज है। एक तरफ कांग्रेस को हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका है और भाजपा नेताओं पर आरोप भी लगाए हैं। वहीं, बीजेपी के कई दिग्गज नेता बार बार सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं और पांच साल सरकार नहीं चला पाने का खुला चैलेंज दे रहे हैं। जिसके चलते मुख्यमंत्री सरकार को मजबूती प्रदान करने के लिए नाराज विधायकों और सहयोगियों की कोशिश करेंगे। मंत्रिमंडल विस्तार में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायकों के साथ बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों को भी मौका दिया जाएगा। कमलनाथ बसपा सुप्रीमो मायावती से भी चर्चा करेंगे। बसपा के दो विधायकों में से एक को ही मंत्री बनाया जाना है।

नाराजगी दूर करने का प्रयास : कैबिनेट गठन के बाद सपा और बसपा के विधायकों को मंत्री नहीं बनाने पर दोनों ही दलों ने नाराजगी जाहिर की थी। विधानसभा सत्र के दौरान बसपा विधायक रामबाई ने तो चेतावनी दे डाली थी कि अगर मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया तो जो विश्वास कर रहा है, वह विश्वासघात भी कर सकता है। फिलहाल बसपा प्रमुख मायावती ने समर्थन दिया है, इसलिए कांग्रेस के साथ है। वहीं निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने भी कहा था कि मंत्री बनाने का उनसे वादा किया गया है। उन्हें उम्मीद है कि कैबिनेट विस्तार कर उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दी जायेगी। साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक केपी सिंह और बिसाहूलाल सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। केपी सिंह की नाराजगी और विधायक दल की बैठक अनुपस्थिति भी चर्चा में रही। वे राहुल गांधी से भी इस संबंध में आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। बिसाहूलाल भी राहुल गांधी से अपने नाराजगी की शिकायत दर्ज करा चुके हैं। आदिवासी नेता के नाम पर बिसाहूलाल को इस विस्तार में जगह मिल सकती है। सपा के प्रदेश अध्यक्ष गौरी सिंह यादव भी कांग्रेस को चेतावनी दे चुके हैं। राहुल गांधी के चर्चा के बाद से प्रदेश में छह और विधायकों को मंत्री पद दिया जा सकता है।

अजय को मिल सकती है बड़ी कमान : विधानसभा सीट सीधी से लगातार चार बार और कुल छह बार विधायक साथ ही पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल को विधानसभा चुनाव 2018 में मिली हार के बाद कांग्रेस पार्टी का आलाकमान संगठन की बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकता है। सियासी गलियारे में चर्चा है कि आगामी लोकसभा चुनाव 2019 को ध्यान में रखकर संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आज अजय सिंह राहुल कमलनाथ के बुलावे पर दिल्ली रवाना हो सकते है। जहां राहुल गांधी की उपस्थिति में उनकी मुलाकात पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी से हो सकती है। जहां एक बड़ी जिम्मेदारी को लेकर चर्चा की जा सकती है।


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