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चुनाव आयोग ने की घोषणा

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दिन का एलान, बिहार से लेकर गुजरात तक दिखा असर । 


नई दिल्ली। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की ओर से हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम एक साथ घोषित नहीं करने पर गुरुवार को सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सरकार ने आयोग पर “दबाव” बनाया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि गुजरात चुनाव के कार्यक्रम घोषित करने में देरी इसलिए की गई ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 अक्तूबर को अपने गृह राज्य के दौरे के दौरान लोकलुभावन घोषणाएं कर “फर्जी सांता क्लॉज” के तौर पर पेश आएं और “जुमलों” का इस्तेमाल करें। पार्टी ने कहा कि यदि गुजरात चुनाव के कार्यक्रम अभी घोषित कर दिए गए होते तो राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गई होती ।
प्रदेश में चुनाव केवल एक चरण में होंगे, 9 नवंबर को हिमाचल की जनता वोट करेगी और 18 दिसंबर को वोटो की गिनती होगी।  ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर हिमाचल प्रदेश में चुनाव के तारीख के ऐलान के साथ ही बिहार सरकार के एक मंत्री की धड़कन क्यों बढ़ गई है ? आखिर क्या है हिमाचल प्रदेश के चुनाव का बिहार कनेक्शन ?
चिलिए अब बताते है कि हिमाचल प्रदेश के चुनाव का बिहार से क्या हिसाब- किताब है। दरअसल  बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ,नीतीश कुमार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बनने से पहले से ही हिमाचल प्रदेश में भाजपा के प्रभारी हैं। इसी साल मई के महीने में हिमाचल का दायित्व संभालने से पहले मंगल पांडे बिहार भाजपा के अध्यक्ष थे और उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें हिमाचल की नई जिम्मेदारी सौंपी गई थी।  यानी मंगल पांडे एक साथ दो जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, बिहार में स्वास्थ्य मंत्री और हिमाचल में भाजपा के प्रभारी।  
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने अपने टि्वटर अकाउंट पर डाले एक वीडियो संदेश में आरोप लगाया है कि , ‘अब यह साफ है कि हिमाचल के साथ गुजरात चुनाव के कार्यक्रमों की घोषणा टालने के लिए मोदी सरकार और भाजपा चुनाव आयोग पर दबाव डाल रहे हैं ताकि उनके राजनीतिक हित पूरे हो सकें।’ साथ ही उन्होंने ट्वीट किया, ‘कारण यह है कि प्रधानमंत्री एक फर्जी सांता क्लॉज के तौर पर 16 अक्तूबर को गुजरात जा रहे हैं ताकि ऐसी लोक लुभावन घोषणाएं कर सकें और ऐसे जुमलों का इस्तेमाल कर सकें जो उन्होंने 22 साल से लागू नहीं किए।’
 


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