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Monday 4th of February 2019 | पश्चिम बंगाल में हाई वोल्टेज सियासी ड्रामा

मोदी और ममता के बीच जारी सियासी जंग में पीस रहीं संवैधानिक एंजेसियां, जारी है हाई प्रोफाइल ड्रामा


लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल सहित देश की सियासत गर्मा गई है। एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी बंगाल जीतने के लिए लगातार प्रदेश सरकार पर हमलावर है। वहीं, दूसरे तरफ राज्य में बैठी ममता सरकार बीजेपी के बढ़ते जनाधार को रोकने के लिए हर नए दांव चल रही है। इसी के साथ ही प्रदेश की राजनीति में हाईवोल्टेज ड्रामा कल रात से ही जारी है। जिसमें केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की ममता सरकार के बीच जारी सियासी जंग के बीच देश व प्रदेश की संवैधानिक एंजेसियां भी पीसती नजर आ रही है। सियासत का यह हाई प्रोफाईल ड्रामा उस समय उफान पर आ गया जब शारदा चिट फंड घोटाले की जांच कर रही सीबीआई की टीम मामले से जुड़े कलकत्ता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के आवास पर रविवार की शाम करीब 6.30 बजे छापेमारी करने पहुंच गई। जिसकी भनक लगते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौके पर पुलिस कमिश्नर के आवास पर पहुंच गई। जिसके बाद ममता की राज्य पुलिस ने जांच के लिए पहुंची सीबीआई की टीम को हिरासत में ले लिया और ममता दीदी मेट्रो सिनेमा रोड पर देर रात केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए धरने पर बैठ गई। ऐसे में अब सवाल उठना लाजमी है कि सत्ता बचाने के लिए संवैधानिक एजेंसियों का दुरूपयोग करना कहां तक सार्थक है और क्या किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसा कोई अधिकार है। इन सब के सबसे अहम बात यह है कि सीबीआई ने इस मामले में राज्य सरकार के खिलाफ अवमानना का केस दर्ज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिया है जिस पर कोर्ट ने सुनवाई की तारिख मंगलवार निर्धारित की है। प्रदेश में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बाद से सियासत भी तेज हो गई है एक ओर जहां तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता कलकत्ता में जगह जगह बेकाबू हो रहे है। वहीं, दूसरे तरफ विपक्षी दल भी सरकार पर मनमानी करने और लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगा रही है। इन सब के बीच खास बात यह है कि लोकतंत्र सुरक्षित करने की दुहाई के साथ ही ममता ने नया दांव खेल दिया है और सरकार के विरोध में रैली करने की घोषणा कर दी है। जिसकी तैयारियां भी तेज हो गई है वहीं, अन्य राज्यों के विपक्षी दलों ने ममता को समर्थन देने की घोषणा भी कर दी है। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता पर मोदी का दांव भारी पड़ता है या मोदी पर ममता का सियासी पैतरा दोनों के बीच जारी यह सियासी जंग किस स्थिति पर पहुंचती है अब यह देखने वाली बात होगी।      


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