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Thursday 19th of October 2017 | शक्ति सम्प्रदाय की प्रमुख देवी मां काली

शक्ति सम्प्रदाय की प्रमुख देवी मां काली की होती है आज के दिन विशेष पूजा 


आज के दिन पूरे देशभर में लक्ष्मी मां की पूजा की जाती है, लेकिन पश्चिम बंगाल में और देशभर में रह रहा पश्चिम बंगालआज के दिन मां काली की पूजा करता है। अमावस्या की रात में मां दुर्गा का आगमन होता है। जिसे हम शारदीय नवरात्र के तौर पर जानते हैं। बंगाल में रही  15 दिन बाद दूसरी अमावस्या में मां काली की पूजा करने की प्रथा है।
पूजा में माता को विशेष रूप से 108 गुड़हल के फूल, 108 बेलपत्र एवं माला, 108 मिट्टी के दीपक और 108 दुर्वा चढ़ाने की परंपरा है। साथ ही मौसमी फल, मिठाई, खिचड़ी, खीर, तली हुई सब्जी तथा अन्य व्यंजनों का भी भोग माता को चढ़ाया जाता है। तड़के 4 बजे तक चलने वाली इस पूजा की विधि में होम-हवन व पुष्पांजलि का समावेश होता है। इस मौके पर अधिकांश महिला व पुरुष सुबह से उपवास रखकर रात्रि में माता को पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।
शक्ति सम्प्रदाय की प्रमुख देवी हैं मां काली, यह कुल दस महाविद्याओं के स्वरूपों के स्थान पर हैं। शक्ति का महानतम स्वरुप महाविद्याओं का होता है। काली की पूजा-उपासना से भय खत्म होता है। इनकी अर्चना से रोग मुक्त होते हैं। राहु और केतु की शांति के लिए मां काली की उपासना अचूक है। मां अपने भक्तों की रक्षा करके उनके शत्रुओं का नाश करती हैं। इनकी पूजा से तंत्र-मंत्र का असर खत्म हो जाता है।
मां काली की पूजा दो तरीके से की जाती है। एक सामान्य और दूसरी तंत्र पूजा। सामान्य पूजा कोई भी कर सकता है, पर तंत्र पूजा बिना गुरू के संरक्षण और निर्देशों के नहीं की जा सकती। काली की उपासना सही समय मध्य रात्रि का होता है। इनकी पूजा में लाल और काली वस्तुओं का विशेष महत्व है। मां काली के मंत्र जाप से ज्यादा इनका ध्यान करना उपयुक्त होता है।


 


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