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Wednesday 10th of April 2019 | यूपीए और एनडीए के शासन में नक्सली घटनाएँ

आतंकवाद के बाद देश के सामने दूसरी बड़ी समस्या नक्सली घटनाएँ


देश के अन्दर ही एक बड़ी चुनौती है नक्सलवाद| नक्सलवादी घटनाएं आये दिन सामने आती रहती हैं| चुनाव के इस दौर में इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि किस सरकार में नक्सलवादी घटनाएं कम हुई हैं, किस दल की शासनकाल में नक्सलवादी घटनाओं पर काबू करने की कोशिशें की गयी| बात चाहे मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार के समय दंतेवाड़ा में सबसे बड़ा नक्सली हमला हो या फिर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार के शासनकाल में सुकमा नक्सली हमला हो, आंकड़ों के लिहाज से अगर नजर डालें तों दोनों ही सरकारों में नक्सलियों ने अपना खूनी खेल जारी रखा है, आपको जानते हैं पिछले दस सालों में हुए नक्सली हमलों और हिंसा की घटनाओं के बारे में|

यूपीए के शासनकाल में

यूपीए सरकार के शासनकाल में छत्तीसगढ़ के राजनादगांव में मानपुर मोहला के जंगलों में अपने साथियों को बचाने निकली पुलिस टीम खुद ही नक्सलियों के हमले का शिकार हो गई थी| बात है 12 जुलाई 2009 मदनवाड़ा पुलिस चौकी पर दो सिपाहियों की हत्या की खबर के बाद एसपी वीके चौबे करीब 100 जवानों के साथ पुलिस चौकी की तरफ रवाना हुए थे, लेकिन रास्ते में नक्सलियों ने बारूदी सुरंग बिछा रखी थी| जोरदार धमाके और गोलीबारी के बीच ज्यादातर जवान संभलने से पहले ही शहीद हो गए थे| इसी दिन सीतापुरमें नक्सलियों द्वारा एक और बड़ा हमला किया गया था जहां पुलिस के 10 जवानों की हत्या कर उनके हथियार लूट लिए गए थे| वहीं नाल्सलियों ने 6 अप्रैल 2010 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में एक और हमला किया इस हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हो गए थे| नक्‍सली सीआरपीएफ जवानों को अपने जाल में फंसा कर सड़क से 400 मीटर की दूरी पर ले गए थे इस खूनी भीड़ंत में नक्सलियों की तरफ से 3000 राउंड गोलियां चलाई गई थीं| सीआरपीएफ के जवानों की गोलियों से नक्सलियों के नौ नेता मारे गए थे|

छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों ने कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं पर हमला कर दिया था| 25 मई 2013 को  तोंगपाल से 31 किमी पहले झीरम घाटी में इस हमले को अंजाम दिया गया था| नक्‍सलियों के हमले में कांग्रेसी नेता महेंद्र कर्मा और उदय मुदलियार समेत 28 लोगों की मौत हो गई थी इनके अलावा 10 पुलिसकर्मी भी शहीद हो गए थे वहीं इसी हमले के बाद 6 कांग्रेस नेता लापता भी हो गए थे| इस हमले में नक्सलियों के मुख्य निशाने पर थे छत्तीसगढ़ कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष नंद कुमार पटेल| कांग्रेसी नेताओं के काफिले में कुल 20 गाड़ियां थीं, जिनमें नेताओं समेत करीब 120 कार्यकर्ता भी शामिल थे| बताया जाता है कि नक्सलियों ने कांग्रेस के काफिले पर लगातार दो घंटे तक फायरिंग की थी| वहीं 11 मार्च 2014 को छत्तीसगढ़ के ही सुकमा में एक बार फिर नक्‍सलियों ने खून कीनदियाँ बहा दी थी| नक्सलियों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान जीरम घाटी में सुरक्षा बलों को निशाना बनाया था| जिसमें 14 जवान शहीद हो गए थे| छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में एक बड़ा नक्सली हमला 12 अप्रैल 2014 को किया गया था जिसमे सुरक्षा बल के 5 जवानों समेत 14 लोगों की मौत हो गई थी|

एनडीए के शासनकाल में

एनडीए के शासन में अगस्त 2014 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के जवानों पर हमला कर दिया था जिसमे सीआरपीएफ के तीन जवान घायल हो गए थे| मार्च 22,2015 को लातेहार इलाके में नक्सलियों ने कुछ राज नेताओं के परिजनों को अपना निशाना बनाया था| नक्सलियों ने लातेहार-लोहरदगा जिले की सीमा पर स्थित मुरमू गांव के जमींदार, भाजपा नेता और झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ठाकुर बालमुकुंद नाथ शाहदेव के दो भाईयों और भतीजे की हत्या कर दी थी| इनके शव मरायन जंगल से बरामद हुए थे|  छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने बारुदी सुरंग बिछाई थी, जैसे ही सुरक्षा बलों का काफिला वहां से गुजरा, तभी नक्सलियों ने हमला कर दिया और इसी दौरान बारुदी सुरंग के फटने से सुरक्षा बल के 4 जवान शहीद हो गए थे, जबकि 8 जवान घायल हो गए थे ये हमला अप्रैल 2015 को किया गया था|| वहीं एक बार फिर मार्च 2015 को छत्तीसगढ़ के ही दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने लैंडमाइन ब्लास्ट किया था, जिसमें वहां से गुजरने वाले CRPF के काफिले के 7 जवान शहीद हो गए थे|

इसके बाद 11 मार्च 2017 को छत्तीसगढ़ में ही नक्सलियों ने सीआरपीएफ की 219वीं बटालियन को निशाना बनाकर जोरदार हमला किया था, जिसमें सीआरपीएफ के 12 जवान शहीद हो गए थे|  अगले ही महीने 25 अप्रैल 2017 को छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों ने एक बड़े हमले को अंजाम दिया था| इस नक्सली हमले में 26 जवान शहीद हो गए थे, जीरम घाटी हमले के बाद इसे सबसे बड़ा नक्सली हमला माना गया था| 13 मार्च 2018 को छत्तीसगढ़ के सुकमा के क्सिटाराम में हमला हुआ जिसमे 9 जवान नक्सली हमले में शहीद हो गए वहीं 6 जवानों की हालत गंभीर हालत में थे|  सीआरपीएफ की 212वीं बटालियन के ये सभी जवान हैं| सभी जवान एंटी लैंडमाइन व्हीकल में सवार थे| छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में अरनपुर में 30 अक्टूबर 2018 को मीडियाकर्मियों पर नक्सलियों ने हमला कर दिया था,यह हमला दूरदर्शन की मीडिया टीम पर किया सुबह के वक्त किया गया था जिसमे दूरदर्शन के एक कैमरामैन की मौत हो गई थी, जबकि मीडिया टीम की सुरक्षा में लगे दो जवान भी शहीद हो गए थे|

वहीं 11 नवम्बर 2018 में छत्तीसगढ़ में हुए एक नक्सली हमले में सुरक्षा बलों के पांच जवान और एक स्थानीय नागरिक घायल हो गए थे| यह हमला बीजापुर और कांकेर जिले में हुआ था, सुरक्षा बलों की जिस टीम पर हमला हुआ वह बीजापुर में चुनाव ड्यूटी से अपने कैंप की ओर लौट रही थी| डीआईजी (एंटी नक्सल्स ऑपरेशंस) पी सुंदर राज ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि यह हमला आईईडी विस्फोट से किया गया था| इसी साल 4 अप्रैल 2019 में छ्त्तीसगढ़ के कांकेर में सुरक्षा बल के जवानों की नक्सलियों से मुठभेड़ हो गई| इस दौरान बीएसएफ के 4 जवान शहीद हो गए| जबकि दो जवान गोली लगने से घायल हो गए| आपको बता दें की बीएसएफ की टीम उस इलाके में सर्चिंग ऑपरेशन चला रही थी| उसी दौरान नक्सलियों ने हमला कर दिया था| दंतेवाड़ा में मतदान से ठीक पहले 9 अप्रैल 2019 को छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने बीजेपी विधायक के काफिले पर हमला कर दिया| नक्सलियों ने बीजेपी विधायक के काफिले में शामिल एक बुलेटप्रूफ कार को निशाना बनाते हुए बड़ा धमाका किया| जिसमें बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की मौत हो गई और हमले में 4 जवान भी शहीद हो गए हैं| कुछ जवान घायल भी हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए भेजा गया है|

 


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