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Monday 22nd of April 2019 | धमाकों से दहला श्रीलंका

श्रीलंका में हुए सीरियल बम धमाकों के पीछे नेशनल तौहीद जमात संगठन का नाम


 

श्रीलंका के इतिहास में हुए सबसे बड़ी आतंकी घटना के पीछे नेशनल तौहीद जमात नाम के स्थानीय संगठन का हाथ था। श्रीलंका के एक शीर्ष मंत्री ने सोमवार को यह जानकारी दी। ईस्टर के मौके पर हुए इस घातक हमले में करीब 290 लोगों की मौत हो गई थी वहीँ 500 अन्य घायल हो गए थे।श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री एवं सरकारी प्रवक्ता रजीत सेनारत्ने ने भी कहा कि विस्फोट में शामिल सभी आत्मघाती हमलावर श्रीलंकाई नागरिक मालूम हो रहे हैं।

वहां संवाददाता सम्मेलन में मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय इंटेलिजेंस एजेंसी के प्रमुख ने 11 अप्रैल से पहले इन हमलों की आशंका को लेकर पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) को आगाह किया था। सेनारत्ने ने कहा, चार अप्रैल को, अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों ने इन हमलों को लेकर आगाह किया था। आईजीपी को नौ अप्रैल को सूचित किया गया था।”

 

सेनारत्ने ने कहा कि कट्टर मुस्लिम समूह -नेशनल तौहीद जमात नाम के स्थानीय संगठन को इन घातक विस्फोटों को अंजाम देने के पीछे माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जुड़े हुए हों । इस मामले में 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

सेनारत्ने ने सुरक्षा में हुई इस बड़ी चूक के लिए पुलिस प्रमुख पुजीत जयासुंदरा का इस्तीफा मांगा है। सरकार के एक मंत्री एवं मुख्य मुस्लिम पार्टी - श्रीलंकन मुस्लिम कांग्रेस के नेता रॉफ हकीम ने कहा कि यह निराशाजनक है कि इस तरह की जानकारी के बावजूद कोई सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए। प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा था कि इस बारे में जांच जरूर की जाएगी कि खुफिया विभाग की खबरों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया। इस बीच, राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने हमलों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश विजित मलालगौड़ा, पूर्व आईजीपी एन के इलंगाकून और पूर्व कानून एवं व्यवस्था सचिव पद्मसिरी जयामणे इस समिति में शामिल हैं।


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