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Wednesday 25th of October 2017 | झारखण्ड: 10 दिन, 3 मौतें और तीनों भूख से

झारखण्ड: 10 दिन, 3 मौतें और तीनों भूख से


झारखंड में फिर भूख से एक मौत हुई है और मौत का यह मामला सामने आया है देवघर के मोहनपुर प्रखंड अंतर्गत भगवानपुर गांव से जहाँ 62 वर्षीय रूपलाल मरांडी की मौत भूख की वजह से हो गयी | कहा जा रहा है कि बायोमेट्रिक मशीन में अंगूठे का निशान ना मिलने पर 2 माह से राशन नहीं दिया गया इस वजह से घर में अन्न का एक दाना न होने के कारण 2 दिनों से घर में चूल्हा नहीं जला था | पड़ोस में रहने वाले परिवार ने कुछ भात दिया था जिससे परिवार 2 दिन किसी तरह भूख मिटा पाया लेकिन फिर हिम्मत टूट गयी और रूपलाल मरांडी की मौत हो गयी जी हाँ भूख से मौत | 15 दिन के अंदर झारखंड में यह तीसरी मौत है राज्य के सिमडेगा में आधार लिंक नहीं होने के कारण 11 वर्ष की बच्ची संतोषी की मौत हुई जो भात-भात मांगते हुए मौत के मुंह में समा गयी | 3 दिन पूर्व धनबाद जिले में 40 साल के रिक्शा चालक की मौत भूख की वजह से हुई जहां राशन कार्ड ना होने के कारण उसे राशन नहीं मिल सका |रिक्शा चालक वैद्यनाथ पिछले 3 सालों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते थक गया था लेकिन उसका राशन कार्ड नहीं बन सका और अंत में मौत मिली, भूख से मौत | वह हार गया इस सिस्टम से, हार गया हमारी इस व्यवस्था से | 21 वी सदी के विकास के नीचे बैठे गरीब भूख से मर रहे और वजह आप का सिस्टम,डिजिटल भारत,बेरोजगारी,अशिक्षा ही है अब आप के ट्वीट कहाँ हैं |झारखण्ड की ये 3 मौतें सामान्य नहीं हैं ये सीधा सवाल आप की व्यवस्था और आप के वादों पर खड़ा करती है |

सोचिये उस मासूम के बारे में –

11 साल की मासूम जिसे हम देश का मानव संसाधन मानते है संतोषी भूख से चिल्लाते-चिल्लाते मर गयी| इस मौत के लिए जिम्मेदार कौन | इतनी रफ़्तार से विकास होगा क्या यही है हमारा स्वर्णिम भारत | एक रिक्शा चालक 3 साल से सरकारी दफ्तर के चक्कर लगा-लगाकर थक गया और अंत में उसे भी मिली सिस्टम से मौत | कल  हुई मौत का कारण बायोमैट्रिक मशीन में अंगूठे का निशान न मिलना है अब आप ही बताइए इन सब मौतों का दोषी कौन ?


जिस पत्रकारिता का कभी स्वर्णिम युग ना था , उसमे स्वर्णिम व्यक्तित्व की तरह उ

अटल जी के निधन से आहत हुआ देश !


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