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ठुमरी की रानी गिरिजा देवी।  

नहीं रही प्रख्यात शास्त्रीय गायिका, ठुमरी की रानी गिरिजा देवी।  


ऑल इंडिया रेडियो इलाहाबाद पर सन 1949 में अपने गायन की सार्वजनिक शुरुआत करने वाली, ठुमरी राग की रानी कहे जाने वाली पद्म विभूषण से सम्मानित प्रख्यात शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी का मंगलवार को दिल का दौरा पड़ने से कोलकाता के एक अस्पताल में 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 

गिरिजा देवी का जन्म 8 मई 1929 को बनारस में एक उच्च वर्ग के परिवार में हुआ। 1949 में 20 साल की उम्र में पहली बार गिरिजा देवी ने पहली बार अपनी कला लोगों के सामने पेश की, लेकिन इसके लिए उन्हे अपने परिवार के खासा विरोध का सामना करना पढ़ा। क्यूंकि उस वक्त किसी भी उच्च परिवार की महिला का सार्वजनिक तौर पर गाना गाना अच्छा नहीं माना जाता था। जिसके बाद गिरजा देवी ने दूसरों के लिए निजी तौर पर प्रदर्शन करने से मना कर दिया था, लेकिन फिर 1951 में बिहार में उन्होने अपना पहला सार्वजनिक संगीत कार्यक्रम किया। और इसके बाद वो लगातार अपने मधुर गायन की वजह से मशहूर होती गई। 1980 के दशक में कोलकाता में आईटीसी संगीत रिसर्च एकेडमी और 1990 के दशक के दौरान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संगीत संकाय के एक सदस्य के रूप में उन्होने काम किया। इसके साथ ही उन्होने संगीत की इस अलौकिक मधुर धरोहर को बचाए रखने के लिए कई छात्रों को शिक्षा भी दी। 

गिरिजा देवी के प्रदर्शनों की सूची अर्द्ध शास्त्रीय शैलियों कजरी, चैती और होली भी शामिल है। ठुमरी में महारत प्राप्त गिरिजा देवी भारतीय लोक संगीत और टप्पा भी गाती थी। 
गिरिजा देवी अपने गायन शैली में अर्द्ध शास्त्रीय गायन बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाने के क्षेत्रीय विशेषताओं का मिश्रण कर के उसके शास्त्रीय प्रशिक्षण को जोड़कर एक तरह के संगीत का सृजन करना ही उनकी खासियत थी, गिरजी देवी को ठुमरी की रानी के रुप में भी माना जाता है। 


 


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