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Tuesday 25th of June 2019 | 25 जून.....वर्ल्ड कप और आपातकाल

वर्ल्ड कप प्रेमियों को जीत की बधाई और आपातकाल के पीड़ितो को दुहाई


25 जून 1975, जब देश ने आपातकाल को देखा, यही दिन 1983 में आया जब वर्ल्ड कप भी भारत ने अपने घर लाया | दोनों ही वाकया इतनी जल्दी में हुआ, जिसकी कल्पना भी किसी ने नही की थी | बात आपातकाल की इंदिरा गाँधी ने कैबिनेट की सिर्फ़ आधे घंटे की एक औपचारिक बैठक करते हुए गिरफ्तार होने वाले व्यक्तियों की लिस्ट सौंपी तब तत्कालीन रक्षा मंत्री स्वर्ण सिंह के एक सवाल-“किस कानून के तहत ये गिरफ्तारियां हुयी हैं”, जिसका जबाब भी सिर्फ़ उन्ही दोनों के बीच रह गया था, इसके बाद देश को आपातकाल का तौफा दिया श्रीमती गाँधी ने |

वहीँ दूसरी तरफ दिन वही 1983 का जब कपिल देव ने देश को ऐतिहासिक जीत दिलाया, सिर्फ़ एक डायलाग से-“अगर हमने 183 का स्कोर किया है तो यह इस खेल का सर्वश्रेष्ठ स्कोर होना चाहिए”, यह ठीक वैसे ही था जैसे स्वर्ण सिंह का इंदिरा गाँधी से सवाल |

बहरहाल देश को आपातकाल देने की रणनीति बनायीं जा रही थी, ध्यान देने वाली बात यह है की इंदिरा गाँधी ने उस समय के कानून मंत्री एच आर गोखले से भी सलाह-मशविरा नहीं किया | इंदिरा गाँधी ने सिर्फ इस डर से कि कहीं अमेरिका के द्वारा सीआईए की मदत से उनका भी तख्ता पलट न कर दिया जाय जैसा चिली के राष्ट्रपति का तख्ता पलट क्र दिया गया था, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति की हेट लिस्ट में सबसे उपर थीं, और इसलिए भी क्योंकि देश में अशांति का माहौल भी बन चुका था सरकार के खिलाफ़ | यह तो नहीं कह सकते कि कपिल देव उस समय क्या कर रहे थे लेकिन इतना तो कह सकते वर्ल्ड कप का सपना नहीं ही देख रहे होंगें, हो सकता है कपिल देव इसे गलत कह कर नकार दें | लेकिन मुझे कोई फर्क नही पड़ता |

जैसे देश में सत्ता के खिलाफ़ माहौल था वैसे ही इंग्लैंड के अखबारों में इंडिया के खिलाफ़ | दरअसल सेमी फ़ाइनल में इंग्लैंड का मुकाबला इंडिया से होना था, और ब्रिटिस अखबारों में पहले ही यह ख़बर प्रकाशित कर दी गयी की, “इंलैंड अब फ़ाइनल से एक कदम दूर”, जबकि उसे इंडिया से अभी खेलना बाकी था, ऐसा इसलिए भी क्योंकि इंग्लैंड एक बार फाइनल तक पहुच चुका था और इस वर्ल्ड कप में मेज़बान टीम एक भी मैच नही हारी थी | जहाँ तक इंडिया की बात है वह पिछले दोनों वर्ल्ड कप में ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गयी थी |

कपिल देव की “जीत” वाली बात “सवाल” इसलिए भी था क्योंकि इंडिया को पिछले दो बार की विजेता वेस्ट इंडीज को मात देना था और इसलिए भी क्योंकि मेज़बान टीम ने अपने पिछले तीन मुकाबले रनों का पीछा करते हुए बड़े अंतर से जीत चुकी थी, जिसमे पड़ोसी पाकिस्तान को भी सेमी फ़ाइनल में वेस्ट इंडीज ने लगभग इतने ही रनों का पीछा करके धुल चटायी थी |

भूतकाल में जो भी हुआ हो लेकिन स्वर्ण सिंह का ना तो "सवाल" रोक पाया आपातकाल को, ना ही इंडिया को रोक पायी इंग्लैंड और दो बार की विजेता वेस्ट इंडीज |खैर वर्ल्ड कप प्रेमियों को जीत की बधाई और आपातकाल के पीड़ितो को दुहाई | 

                                                                                                                                           रजनीश तिवारी


जनता को बड़ी उम्मीदें होती हैं जनप्रतिनिधि से, फिर चोर बनाम डाकू क्यों?


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