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एचमएस यूनीयन का हल्लाबोल

एचमएस यूनीयन का हल्लाबोल, 10 हाजार कार्यकर्ताओं और मजदूरों ने किया SECL मुख्यालय में विरोध प्रदर्शन। 


बिलासपुर। 1 नवंबर को जहां मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस मना रहा था। वहीं मध्यप्रदेश के SECL मजदूर एचमएस यूनीयन के साथ मिलकर बिलासपुर स्थित SECL मुख्यालय में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। दरअसल पिछले कई दिनों से 10वें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते के विरोध में SECL के मजदूर एचएमएस यूनियन के महामंत्री नाथू लाल पांडेय के नेत्रित्व में विरोध प्रदर्शन कर रहे है। और उसी प्रदर्शन को आगे बढ़ाते हुए बुधवार को भी बिलापुर में एचएमएस यूनियन के कार्यकर्ताओं और मजदूरों द्वारा एक विशाल विरोध प्रदर्शन रैली निकाली गई, जिसमें तकरीबन 10 हाजार लोगों ने 600 गाड़ियों के काफिले के साथ अपना विरोध प्रदर्शन करते हुए 10वें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते का कड़ा विरोध किया। 

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान SECL एचएमएस यूनियन के महामंत्री नाथू लाल पांडेय ने बताया कि, दसवें वेतन समझौते में कई विसंगतियां है। और ड्रॉफ्ट कमेटी की बैठक के बाद उन विसंगतियों को श्रमिकों के सामने रखा गया जिसमें श्रमिकों की राय के अनुरूप जेबीसीसीआई की अंतिम बैठक में यूनियन प्रतिनिधियों ने इसका पुरजोर विरोध किया। और प्रबंधन तथा तीन केंद्रीय यूनियनों की सहमति होने के बाद समझौता मान लिया गया। लेकिन  एचएमएस यूनियन का प्रतिनिधित्व कर रहे नाथू लाल पांडेय ने दसवें वेतन समझौते को मानने से इनकार कर दिया और  जेबीसीसीआई की अंतिम बैठक में दसवें वेतन समझौते को अपनी सहमती देने से मना कर दिया। 

आखिर क्यूं एचमएस यूनियन दसवें वेतन समझौते को नहीं दे रहा अपनी सहमती ? : 

दरअसल एचएमएस यूनियन का कहना है कि 10वें वेतन समझौते से मजदूरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्यूंकि सेवाकाल में अगर किसी कर्मी या मजदूर का निधन हो जता है या फिर कर्मचारी काम करने के लिए मेडिकली अनफिट हो जाता है तो, कर्मचारी के नियोजन के लिए हर वेतन समझौते में प्रवधान रहा है। लेकिन इस बार प्रबंधन ने 10वें वेतन समझौते के जरिए एक मजदूर के हक में होने वाले इस प्रावधान को समाप्त करने की रणनीति बनाई है। और इसके लिए प्रबंधन द्वार मनमाने तरीके से रविवार सहित और भी अन्य सुविधाओं को जो मजदूरों के हक में है उसे बंद कराया जा राहा है।  


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