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Saturday 3rd of August 2019 | मप्र और यूपी सरकार आमने सामने

उन्नाव कांड पर राजनीति ने पकड़ा जोर, कमलनाथ- योगी आमने सामने


उन्नाव रेप कांड पर जारी सियासत अब और तेज हो गई है। यह मामला उत्तरप्रदेश से उछलकर मध्यप्रदेश में आ गया है। दरअसल बीते शुक्रवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने रेप पीड़िता के परिवार को ट्वीट के माध्यम से मध्यप्रदेश में आकर रहने का न्यौता देते हुए यूपी की योगी सरकार पर निशाना साधा। उनके इस अपील के बाद सियासत और गर्मा गई है। कमलनाथ के बयान के बाद बीजेपी हमलावर हो चली है। बीजेपी ने उल्टा कमलनाथ से ही सवाल दागते हुए पूछा है कि पहले बताएं एमपी में बेटियां कितनी सुरक्षित है। वहीं, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि कमलनाथ जी, बेटियों पर ओछी राजनीति न कीजिए, बेटियां बांटी नहीं जातीं।

           भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद  राकेश सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में दुधमुंही बच्चियों से लेकर स्कूली छात्राएं तक हैवानियत की शिकार हो रही हैं। बच्चियां न घरों में सुरक्षित हैं, न स्कूल में और न मां के आंचल में। मुख्यमंत्री कमलनाथ को उन्नाव की दुष्कर्म पीड़िता को प्रदेश में बसने का आमंत्रण देने से पहले यह बताएं कि मध्यप्रदेश की कानून व्यवस्था आज किस दौर में पहुंच गयी है। मध्यप्रदेश की बेटियों को कितनी सुरक्षा वे दे पा रहें हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का यह आमंत्रण बताता है कि वे संवेदनशील विषयों पर भी राजनैतिक रोटियां सेंकने से बाज नहीं आते हैं। मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए राकेश सिंह ने कहा मुख्यमंत्री कमलनाथ दुष्कर्म पीड़िता को बेटी की तरह सुरक्षा देने का वादा कर रहे हैं तो उन्हें यह बताना चाहिए कि क्या प्रदेश में दुष्कर्म और हत्या की शिकार हो रही बेटियों को मुख्यमंत्री अपनी बेटियां नहीं मानते। या फिर वह उन्नाव की दुष्कर्म पीड़िता को भी ऐसे ही असुरक्षित माहौल के बीच प्रदेश में बसने का आमंत्रण दे रहे हैं। इस मामले के उफान पर आने पर यूपी के सीएम योगी ने कमलनाथ पर पलटवार करते लिखा है कि कमलनाथ जी, बेटियां बांटी नहीं जातीं। राजनीति करिए लेकिन गरिमा और सुचिता बनाए रखिए, बेटियों को लेकर ओछी राजनीति न कीजिये, क्योंकि बेटियां बेटियां होती हैं। कम से कम तंदूरी कांग्रेस इस तरह का उपदेश न दें। इन सारे बयानों के बाद से प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरोप और प्रत्यारोप का दौर जारी है। लेकिन बेटियों पर हो रहे अपराधों में कमी होने का नाम नहीं ले रही है। अब देखना है कि सरकारें इन संवेदनशील मुद्दों पर क्या कठोर निर्णय ले पाती है या फिर सुरक्षा का वादा देकर पुराने ढर्रे पर ही सरकार अपना काम काज करती रहेंगी


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