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Monday 2nd of September 2019 | मध्यप्रदेश सरकार की तबादला एक्सप्रेस के खिलाफ थानेदार

तबादले के चक्करघिन्नी में उलझे थानेदार ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, 8 महीने में हुआ 11 बार स्थानातंरण


मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से जारी तबादले का दौर अब सरकार के लिए मुसीबत की सबब बनती जा रही है। मुख्यमंत्री कमलनाथ के सत्ता संभालने के बाद से ही कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा अधिकारियों के तबदालों की खबरें सामने आती रही हैं। लेकिन एक थानेदार का इतनी बार तबादला कर दिया गया कि थककर वह हाईकोर्ट पहुंच गया है। आपको बता दें कि थानेदार सुनील लाटा अपने लगातार तबादलों के ख़िलाफ़ जबलपुर हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। कमलनाथ सरकार द्वारा पिछले 8 महीने में उनका 11 बार ट्रान्सफर किया गया है। अभी लाटा बैतूल जिले के सारणी थाने के प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। उनके तबादलों का दौर भी तभी शुरू हुआ, जब मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी। अब उन्हें निवाड़ी जिले के एक थाने में योगदान देने का आदेश आया है। नई सरकार आने के बाद से उनके तबादलों की पर नजर डाले तो आप स्वयं हैरान हो जाएंगे कि आखिर तबादले का बोझ ढोने वाले अधिकारी और कर्मचारी सिर्फ ज्वाइंनिंग और डिस्चार्ज होते रहेंगे तो काम कैसे करेंगे। थानेदार लाटा का स्थानांतरण सबसे पहले बैतूल से आईजी ऑफिस होशंगाबाद किया गया। जिसके बाद होशंगाबाद से उन्हें पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया। वहाँ उन्हें आदिम जाति कल्याण शाखा में रखा गया। इसके बाद उन्हें बैतूल के आदिम जाति कल्याण में भेज दिया गया। इसके बाद उनका तबादला सागर और छतरपुर के लिए हुआ। वहां वह आमद दर्ज करा पाते, उससे पहले ही उनका तबादला कर उन्हें भोपाल भेज दिया गया। उन्हें फिर भोपाल से बैतूल भेज दिया गया, जहाँ वह कोतवाली थाना के प्रभारी रहे। इसके बाद लाटा को फिर लाइन से अटैच कर दिया गया। अंत में उन्हें सारणी थाने का चार्ज दिया गया लेकिन ट्रान्सफर का दौर यहीं ख़त्म नहीं हुआ। सारणी में चार्ज सम्भाले एक सप्ताह भी नहीं बीता था कि लाटा को निवाड़ी जिले में जाने का आदेश जारी कर दिया गया। तबादले के चक्करघिन्नी में उलझे थानेदार लाटा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया। जहां तबादलों के इस फेहरिस्त को पेश करते हुए कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। हालांकि उनकी याचिका पर अभी सुनवाई की कोई तारिख सामने नहीं आई है। लेकिन थानेदार का कोर्ट पहुंचना और तबादले का क्रम देखने के बाद विपक्ष यानी बीजेपी के आरोपों को बल मिलने लगा है। जिसमें विपक्ष ने सरकार पर तबादला उद्योग चलाने का आरोप लगाया था। अब देखना यह है कि हाईकोर्ट में इस मसले पर क्या कुछ होता है|


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