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Thursday 19th of September 2019 | उमा का बड़ा फैसला

हिमालय चली जाएंगी उमा


प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की दिग्गज नेत्री उमा भारती ने एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। उमा अब राजनीति से दूर रहेंगी| उमा भारती का कहना है कि वो डेढ़ साल के लिए हिमालय की गोद जा रही है और वहां वे मौन धारण कर व्रत करेंगी और गंगा के किनारे समय व्यतीत करेंगी। उनके इस फैसले से उन कयासो पर भी विराम लग गया है जिसमें उनके वह एमपी की राजनीति में सक्रिय होने की बात कही जा रही थी। उन्होंने आशा जताई कि इस दौरान गंगा निर्मल हो जाएगी और राममंदिर बन जाएगा। इससे पहले उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था।

उमा भारती ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 50वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महन्त अवेद्यनाथ की पांचवीं पुण्यतिथि समारोह में राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महन्त अवेद्यनाथ की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा के समापन अवसर पर कहा कि वह कल हिमालय से आई हैं और आज ही हिमालय जाएंगी। उन्होंने कहा कि वह वहां डेढ वर्ष तक मौन रहकर जीवन व्यतीत करना चाहेंगी। इसके अलावा उन्होंने आशा जताई है कि आगामी वर्षों में गंगा निर्मल हो जाएगी और यदि गंगा पर कोई संकट आया तो वह प्राण देने से भी नहीं चूकेंगी। साध्वी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सैकडों किलोमीटर क्षेत्र में गंगा बह रही है। आशा है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गंगा को अविरल और निर्मल रखने में महत्व पूर्ण भूमिका निभाएंगे।

भारती ने कहा कि महंत अवेद्यनाथ के आह्वान पर गंगा और तिरंगा के खातिर मैंने अपने आप को न्योछावर कर दिया। मैंने अपने दरवाजे से बरात लौटा दी। महंत अवेद्यनाथ से दीक्षा लेना चाहती थी पर नहीं ले पाई। विजया राजे सिंधिया मेरी मां की तरह थीं। उनके कहने पर अमरकंटक में जाकर दीक्षा ली। अवेद्यनाथ को अपना गुरू और आदर्श मानती हूं।


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