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Saturday 21st of September 2019 | दूसरे भगवान बने रीवा के डॅा. निधीश

ग्रीन कॅारिडोर बनाकर लंग्स का किया गया प्रत्यर्पण, रीवा के डॅाक्टर को मिली सफलता


रीवा के डॅाक्टर निधीश मिश्रा के नेतृत्व में महाराष्ट्र के नागपुर से मृत व्यक्ति के शरीर से लंग्स का सफल प्रत्यर्पण किया गया है। जिसमें नागपुर से लंग्स को प्रत्यर्पित कर लकड़गंज स्थित न्यूइरा हॅास्पिटल पहुंचाया गया। लेकिन इस प्रत्यपर्ण के लिए किस प्रकार की कोशिशें और कवायदें की गई, देखिए एक रिपोर्ट। कहते है डॅाक्टर भगवान का दूसरा रुप होता है। जो किसी भी इंसान को एक नई जिंदगी दे सकता है। जिसमें एक मरीज को नया जीवन देने वालों में रीवा के डॅाक्टर निधीश मिश्रा का नाम भी शामिल हो गया है। एक व्यक्ति को नई जिंदगी देने के चुनौतीपूर्ण कार्य को बड़े ही सफलता से पार कर लिया गया है। जिसमें डॅाक्टरों और प्रशासनिक अमले की कोशिशों के कारण इस सपने को साकार किया जा सका है। दरअसल, शुक्रवार को नागपुर से लंग्स प्रत्यारोपण के लिए मुम्बई भेजा गया। इसके लिए लकड़गंज स्थित न्र्यूइरा हॉस्पिटल से बाबा साहब अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तक ग्रीन कॅारिडोर तैयार किया गया। प्रशासनिक अमले की मदद से चिकित्सकों की टीम ने महज तेरह सेकंड में एयरपोर्ट तक का सफर तय किया। जिसके बाद लंग्स को प्रत्यर्पण के लिए नागपुर से मुम्बई भेजा गया। जहां से उसे ग्रीन ग्लोबल हॉस्पिटल पहुंचाया गया। जहां न्यूइरा हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ- निधीश मिश्रा ने बताया कि इसके पहले भी ग्रीन कॉरिडोर बनाकर लीवर और किडनी को ट्रांसप्लांट किया जा चुका है। लेकिन इन सब के बीच हैरत वाली बात यह है कि मध्य भारत में पहली बार ऐसा हुआ है कि मृत शरीर से लंग्स निकालकर उसे प्रत्यर्पित किया गया है। जानकारी के मुताबिक लंग्स मृत बॅाडी से निकालकर चार घंटे के भीतर दूसरे के शरीर में लग जाना चाहिए। लेकिन इसको पूरा करने के लिए बारह सौ किलोमीटर की दूरी तय करनी थी। जिसके बाद एक मरीज को नई जिंदगी देने के सपने को साकार किया जा सकता था।

कहते हैं कि हिम्मत और विश्वास के आगे सारी आशंकाए धराशयी हो जाती है और सफलता कदम चूम लेती है। डॅाक्टरों के आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत के कारण यह प्रयास सफल हुआ और मेहनत रंग लाई। जिसमें डॅाक्टरों और प्रशासनिक अमले की टीम ने 1200 किलोमीटर की इस दूरी को महज चार घंटे में तय कर अपने इस मुकाम हासिल कर लिया। बताया जा रहा कि यह लंग्स नत्थू अखाडूजी बंजारी के मृत शरीर से लिया गया है। जिनकी ब्रेन हैमरेज से मौत हो गई थी। इसके बाद परिजनों ने पार्थिव शरीर के पार्ट्स को डोनेट करने का निर्णय लिया। जिससे औरो को जीवन दान दिया जा सके। कागजी कार्यवाही पूरी कर अनुमति मिलने के बाद लंग्स को ग्रीन कॅारिडोर के सहारे नागपुर एयरपोर्ट से मुम्बई भेजा गया। हालांकि इससे पूर्व भी ग्रीन कॅारिडोर के मदद से ट्रांसप्लांट के काम किए गए हैं। लेकिन किसी मृत व्यक्ति के लंग्स को सफलता से ट्रांसप्लांट कर लेना वाकई काबिल-ए-तारिफ है।


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