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Monday 16th of December 2019 | चाय हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा

21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस


 

चाय पीना हर किसी को पसंद है। चाय का नाम सुनते ही मन प्रफुल्लित और शरीर ताजगी से भर जाता है।चाय पीने से हमारी सारी थकान मिन्नटो में दूर हो जाती है फिर चाहे हम ऑफिस से घर आए हो या घर से ऑफिस जा रहे हो, फैमिली के साथ बैठकर हंसी मजाक हो रहा हो या किसी टॉपिक पर गंभीर चर्चा एक कप चाय जरूरी होती। चाहे गली नुक्कड़ हो या शहर का चौराहा हर जगह हमें चाय पीने वाले जरूर दिख जाते हैं। तो आज हम चाय से जुड़ी और चाय के इतिहास के बारे में आपको बताएंगे।

सबसे पहले आपको चाय के फायदे बताते हैं। चाय पीने से शरीर में ताजगी आती है।एक कप चाय से सारी थकान मिनटों में दूर हो जाती है।क्या आपको पता है कि चाय का इस्तेमाल हम सिर्फ अपनी थकान दूर करने के लिए ही नहीं आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा चाय का इस्तेमाल बालों को चमकदार आंखों को सुंदर बनाए रखने और मुहांसों की छुट्टी करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। चाय के यह वह फायदे थे जो शायद आप सभी को नहीं पता रहे होंगे इसी तरह चाय के  इतिहास के बारे में भी बहुत कम लोग जानते हैं तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर चाय की शुरुआत कहां से हुई और इसका इतिहास क्या है।

 

दुनिया में सबसे ज्यादा चाय का उत्पादन हमारे देश भारत में होता है और दुनिया में सबसे ज्यादा चाय हम भारतवासी ही पीतें है|

चाय पीने का इतिहास 750 ईसा पूर्व से है| आम तौर पर भारत में चाय उत्तर पूर्वी भागों और नीलगिरी पहाड़ियों में उगाई जाती है| इसका इस्तेमाल 2000 साल पहले एक बौद्ध भिक्षु के साथ शुरू हुआ था जिन्होंने अपनी 7 साल की तपस्या में खुद को जगाए रखने के लिए चाय की पत्तियों को चबाना शुरू किया था जिससे वह अपनी नींद पर काबू पा लेते थे। भारत में चाय का उत्पादन भारत के उत्तर पूर्वी भाग में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने शुरू किया और 19 वी सदी के अंत में असम में चाय की खेती का पदभार संभालने के बाद पहला चाय का बागान भी ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा ही शुरू किया गया था। बता दें कि हर साल 15 दिसंबर को चाय उत्पादन करने वाले देशों में अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जाता है। भारत ने 4 साल पहले मिलान में हुई अंतरराष्ट्रीय खाद्य और कृषि संगठन एफएओ के अंतर सरकारी समूह की बैठक में यह प्रस्ताव पेश किया था की अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस 21 मई को मनाया जाए क्योंकि इसी अवधि में असम में बोहागी बिहू मनाया जाता है और इसके बाद चाय की पत्तियों को तोड़ने का काम प्रारंभ होता है।भारत की सिफारिश पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 साल बाद उनके प्रस्ताव में हामी भरी और 21 मई को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस घोषित कर दिया है| अब 21 मई को पूरी दुनिया एक साथ चाय की चुस्कियां लेती नजर आएंगी।


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