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Sunday 17th of December 2017 | राहुल के सिर सजा ताज

चुनौतियों भरे सफ़र की शुरुआत


कांग्रेस की शुरूआत से ही पार्टी में नेहरु, गांधी परिवार का दबदबा रहा है इसके अलावा पिछले 19 वर्षों से लगातार पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी रहीं हैं और अब जब सोनिया का स्वस्थय ठीक नहीं है इसलिए पार्टी के लिए नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हुआ जिसमें सोनिया गांधी के बेटे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी सौप दी गयी.

 आपको बता दें 12 दिसंबर को राहुल के पार्टी अध्यक्ष बनने के लिए औपचारिक घोषणा हो गई थी जिसके बाद शनिवार को उनकी ताजपोशी कर दी गई अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला उन्होंने कहा की कांग्रेस पार्टी  की लड़ाई क्रोध और हिंसा की राजनीति करने वालों से है.

साथ ही उन्होंने ने कहा अगर एक बार आग लग जाती है तो बुझानें से भी नहीं बुझती है यही बात मैं बीजेपी को समझाना चाहता हूँ. बीजेपी के लोग पूरे देश में आग और हिंसा फैला रहे हैं जिसे सिर्फ कांग्रेस के कार्यकर्ता ही रोंक सकते हैं इसके साथ ही बीजेपी पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कांग्रेस मुक्त भारत बनाने वाली बीजेपी को भी हम अपना भाई मानते हैं हम उन्हें एक नजर से ही देखते हैं बस विचारधारा में फर्क है उनका गुस्सा हमें और ताकतवर बनाता है

इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं को आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा जो इस पार्टी का कार्यकर्ता पार्टी की विचारधारा को अपने खून पसीने से देश के हर गांव और शहर तक पहुँचाता है उस कार्यकर्ता की रक्षा करना मेरी जिम्मेदारी है उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को आश्वासन देते हुए कहा आप सब मेरे परिवार का हिस्सा हो और मैं सबको दिल से अपना प्यार दूंगा.

आपको बता दें दो दिन बाद यानी 18 दिसंबर को गुजरात विधानसभा चुनाव का परिणाम आना जिसमें एग्जिट पोल की मानें तो तो यह चुनाव बीजेपी के पक्ष में जाता दिख रहा है, ऐसे में गुजरात चुनाव के परिणाम के पूर्व ही राहुल गांधी का पार्टी अध्यक्ष चुना जाना एक चुनौती जैसा है.अगर गुजरात चुनाव में कांग्रेस की हार हुई तो अध्यक्ष का स्वागत हार से ही माना जायेगा हालाकि राहुल गाँधी ने गुजरात में सकारात्मक पक्षों के साथ रैली और सभाएं की जिसका फायदा कांग्रेस को मिलेगा.

राहुल गाँधी का ऐसे समय में अध्यक्ष बनना एक चुनौती जैसा है .आज देशभर में ज्यादातर राज्यों में बीजेपी की सरकार है इसलिए राहुल गाँधी का यह सफ़र काँटों के साथ शुरू हो रहा है और नंगे पांव चलना जैसी स्थिति है.

 


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