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मिशन कर्नाटक के रास्ते बीजेपी

अब अमित शाह के टारगेट में कर्नाटक


गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव जीतने के बाद अब बीजेपी की नजर अगले साल यानी 2018 में हो रहे कर्नाटक विधानसभा चुनाव की ओर रहेगी. बीजेपी यहाँ पिछले विधानसभा चुनावों की गलती को दोहराना नहीं चाहेगी और अपने हिदुत्व तथा विकास के एजेड़े के साथ ही इस बार मैदान में उतरना चाहेगी पिछले कई वर्षों से बीजेपी ने जिस प्रकार अपने एजेडों के सहारे देश के कई राज्यों में अपनी सरकार बनाई है यहाँ भी उसी रणनीति के साथ पार्टी मैदान में उतरेगी .

जिस प्रकार देश के 29 राज्यों में से 21 पर बीजेपी का कब्जा हैं इससे उनकी चाल को देखकर ऐसा लग रहा है की बाकी बचे राज्यों में भी बहुत जल्द ही वह अपने विकास के फार्मूले को आजमाकर उसे फतह करने की कोशिश करेंगे.अब कांग्रेस के खाते में बड़े राज्यों की बात करें तो उसमें भी सिर्फ दो ही राज्य रह जाते हैं पंजाब और कर्नाटक . पंजाब में नयी नवेली कांग्रेस की सरकार है  अगले 4 सालों तक बीजेपी उसमें कुछ नहीं कर सकती लेकिन कर्नाटक में जो विधानसभा चुनाव होने हैं उसे जीतकर बीजेपी अपने इस जीत के अभियान को बरकरार रखना चाहेगा और बड़े राज्यों की जीत में एक और राज्य अपने लिस्ट में जोड़ना चाहेगा .

इसके साथ ही यह चुनाव राहुल गाँधी के लिए भी बड़ी चुनौती भरा होगा क्योकि इस चुनाव के पहले ही उन्हे कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुना गया और यहाँ पर अपनी जीत सुनिश्चित कर वह अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ना चाहेंगे .इसके अलावा इस चुनाव में कर्नाटक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की भूमिका भी अहम मानी जाऐगी.वहीं पार्टी में भितरधात के चलते कर्नाटक में बीजेपी की स्थिती काफी कमजोर है यहाँ पर पार्टी के तरफ से जमीनी स्तर के नेताओं को भी खासा निराश किया गया है. वहीं बीएस येदुरप्पा को मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी कार्यकताओं से ही समर्थन नहीं मिल पा रहा है. येदुरप्पा पपहले ही भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे रहे हैं और ऐसे में येदुरप्पा को बीजेपी द्वारा प्रमोट करने से नुकसान बीजेपी को होगा.

 


कुमारस्वामी ने साबित किया बहुमत

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