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Monday 6th of January 2020 | 1456 लोगो पर 1 डॉक्टर, भारत में हर 53 सेकंड में एक नवजात की मौत

22 दिन भी नहीं जी पाते 1000 में से 23 बच्चे,कुपोषण के शिकार है बच्चे


भारत एक समृद्धि शाली देश होने के बावजूद कई दशको से कुपोषण का दंश झेल रहा है आज के आधुनिकता के दौर में भी भारत में कुपोषण एक प्रमुख सामाजिक एवं आर्थिक चुनौती के रूप में विद्यमान हैं पोषण की कमी और बीमारियां कुपोषण सबसे प्रमुख कारण है एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर 53 सेकंड में एक नवजात शिशु की मौत होती है ,ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या वाकई में भारत उन तमाम शिशुओं की पोषण की पूर्ति करने में सक्षम हैं

विश्व स्वास्थ्य संगठन की माने तो भारत में हर साल कुपोषण के कारण मरने वाले शिशु की संख्या दस लाख से भी ज्यादा है, ये आंकड़े हैरान करने वाले हैं रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि आज भी बच्चे भुखमरी के कारण सही पोषण ना मिलने से अपनी जान गवा रहे हैं| वहीं मध्यप्रदेश की बात की जाए तो प्रदेश में आज भी 60 पीसदी बच्चे कुपोषित हैं आंकड़ों पर गौर किया जाए तो मध्यप्रदेश देश के कुल नवजात बच्चों और बाल मृत्यु दर में सबसे आगे मध्य प्रदेश सहित राजस्थान उत्तर प्रदेश उड़ीसा और असम में राष्ट्रीय औसत 65 शिशु प्रति हजार जन्म से ज्यादा मृत्यु दर है| दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में भी जागृति के अभाव में शिशु मृत्यु दर नहीं घट रही है जनजातियों में 14% बच्चे अपना पांचवा जन्मदिन नहीं मना पाते हैं |आदिवासियों में हर एक हजार में से 56 बच्चे जन्म लेने के 28 दिनों के भीतर ही दम तोड़ देते हैं राजस्थान में कोटा की जेकेलोन अस्पताल में पिछले 35 दिनों में 107 बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल खड़े होने लगे इन बच्चों की मौत अस्पताल में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाने के कारण हुई 2 साल पहले उत्तर प्रदेश के बीआरडी अस्पताल में भी ऑक्सीजन सप्लाई की कमी के चलते सिर्फ 5 दिन में 64 बच्चों की मौत हुई थी यूनीसेफ के मुताबिक भारत में हर 53 सेकंड में एक नवजात की मौत होती है यानी रोजाना 16 सौ से ज्यादा, जिन्हें कुपोषण के कारण जान गवाना पड़ती है| देश में नवजात मृत्यु दर प्रति हजार बच्चों पर 23 है यानी हर हजार बच्चों में से 30 की मौत 28 दिन से पहले ही हो जाती है जन्म के बाद 28 दिन बच्चे के सर सर्वाइवल के लिए सबसे अहम होते हैं|

मौत के कारण

भारत में कुपोषण और कुपोषण के चलते बढ़ती हुई शिशु मृत्यु दर की बात की जाए तो एक सबसे बड़ा कारण यह है कि भारत में डॉक्टरों की कमी है भारत में अनुमानन 1456 लोगों के इलाज का बोझ एक डॉक्टर पर है वर्तमान में डॉक्टरों की कमी ही कुपोषण के चलते बच्चों की मौत का मौजूदा कारण है, इस दिशा में सरकार को आवश्यक रूप से महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए इसके बाद ही शिशु मृत्यु दर में कमी आए आ सकती है |

 


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