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Monday 25th of December 2017 | अटल जी: कुशल पत्रकार, उत्कृष्ट राजनेता

विशेष: अटल जी ,सकारात्मक राजनीति के पक्षधर


दलीय राजनीति से ऊपर देश के सर्वमान्य नेता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आज (25 दिसंबर) को 92 साल के हो गए. अटल जी का स्वभाव उनकी लेखनी और उनके विचारों ने देश की सत्ता,समाज नेताओं सब को प्रभावित किया है .अटल जी हिंदी के कवि, एक कुशल वक्ता, पत्रकार और प्रखर राजनेता के रूप में सदैव सकारात्मक राजनीति के परिचायक के रूप में जाने जायेंगे. और भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले महापुरुषों में एक अटल बिहारी अपने आप में एक विचारधारा हैं. अटल जी ने सड़क से संसद तक राष्ट्रहित के लिए अपना योगदान दिया. देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का कुशल प्रबंधन ही था जो उनके नेतृत्व में १३ दलों की गठबन्धन सरकार ने पाँच वर्षों में देश हित के लिए कार्य करती रही.

अटल बिहारी वाजपेयी अपने कर्तव्य के प्रति अटल और स्वभाव से सहज और सरल हैं एक कुशल प्रधानमंत्री के रुप में देश को अपनी सेवाएं दे चुके अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व इतना सरल और सहज था की वो आम जनता के मुद्दों और आम जनमानस में अपनी सीधी पहुंच रखते थे. अटल बिहारी वाजपेयी सरल स्वभाव के साथ कुशल राजनीतिज्ञ के रूप में इस देश की लोकतांत्रिक प्रणाली में अपना योगदान दे चुके हैं. अटल जी की संकल्पना के भारत में राष्ट्रवाद, एकता और विकास की अवधारणा प्रत्यक्ष रुप से देखने को मिलती है .अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यकाल में देश के सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए ठोस कदम उठाने से कभी पीछे नहीं हटे. अटल जी के विचार उनका लेखन उनका पत्रकार दृष्टिकोण देश को एक अलग दिशा की ओर, नव सृजन की ओर जाने के लिए प्रेरित करता है. अटल बिहारी वाजपेयी जी का देश की सांसद में दिए गये भाषण का एक कथन जिसमें उन्होंने कहा था आजादी के बाद से देश लगातार विकास के पथ पर अग्रसर है,आजादी के बाद सरकारों द्वारा किये गये प्रयासों को दरकिनार नहीं किया जा सकता. चुनाव के समय में कोई भी दल या कोई भी नेता अगर राजनीतिक स्वार्थ के लिए यह बोल दे कि देश में काम नहीं हुआ देश ने प्रगति नहीं की ऐसा कहना देश के पुरुषार्थ पर पानी फेरने जैसा होगा .

अंदर अटल बिहारी वाजपेयी आज देश भर में एक विचार के रूप में स्थापित है एकात्म मानववाद, आध्यात्मिकता, राष्ट्रवाद की संकल्पना लिए आदर्श विचारधारा से प्रेरित होकर भारतीय लोकतंत्र में सकारात्मक राजनीति के पक्षधर रहे हैं.


जिस पत्रकारिता का कभी स्वर्णिम युग ना था , उसमे स्वर्णिम व्यक्तित्व की तरह उ

अटल जी के निधन से आहत हुआ देश !


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