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Wednesday 8th of January 2020 | देश भर के 17 राष्ट्रीयकृत बैंक की देशव्यापी हड़ताल

17 राष्ट्रीयकृत बैंक की देशव्यापी हड़ताल, कामकाज हुआ ठप्प


 

8 जनवरी यानी आज 10 ट्रेड यूनियंस की तरफ से भारत बंद का ऐलान किया गया है |छह बैंक यूनियंस ने भी हड़ताल का समर्थन किया है जिसके कारण बैंकिंग कामकाज पर असर होगा| बता दें कि देश भर के 10 यूनियन के करीब 25 करोड़ कर्मचारी हड़ताल में हिस्सा लेंगे। बैंक बंद रहने का असर एटीएम सर्विस पर होगा और 8-9 जनवरी को कैश की किल्लत हो सकती है| मोदी सरकार के विनिवेश, निजी कारण और श्रम सुधार नीतियों के खिलाफ इंटेक्स, आईटेक, आईयूटीयूसी, एलपीएफ के साथ-साथ क्षेत्रीय स्वतंत्र महासंघ और संघों के कार्यकर्ता आम हड़ताल में भाग लेंगे| इसके अलावा स्टूडेंट यूनियन यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने भी हड़ताल का हिस्सा बनने का ऐलान किया है।

बता दे बैंकों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में मध्यप्रदेश की शाखाएं भी शामिल है।केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बैंक कर्मचारी काम बंद किए हुए है जिससे उपभोक्ता परेशान होंगे। इस हड़ताल में 249 किसान संगठन और 80 विद्यार्थी संगठनों ने इस बंद का समर्थन दिया है। संघर्ष कमेटी की घोषणा के मुताबिक गावों से दूध सब्जी फल के साथ साथ हरे चारे की शहर में सप्लाई भी प्रभावित होगी। बैंक यूनियन अपने 12 सूत्रीय मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे है जिसमें सभी के न्यूनतम वेतन 21 हजार से कम ना हो , स्थाई / बाहर मासी कामों के लिए ठेका बंद हो जैसी मांगों को लेकर बैंक यूनियन काम बंद हड़ताल पर है। आज की इस हड़ताल में SBI शामिल नहीं है। एसबीआई को छोड़ कर देश भर के 17 राष्ट्रीयकृत बैंक अपनी आवश्यक मांगों को लेकर बैंकिंग कामकाज से दूर है।

इससे पहले भी बैंक कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर केन्द्र सरकार के खिलाफ लमबंद हो चुके हैं. समय समय पर केन्द्र सरकार को अपनी मांगों से वाकिफ कराते हुए कर्मचारी अपना विराध दर्ज करा चुके हैं. बावजूद इसके अब तक केन्द्र अपनी नीतियों पर अडिग है. बैंको में हड़ताल होने से कामकाज काफी प्रभावित हो रहा है. देश भर में बैंकों की हड़ताल से करोड़ों का लेनदेन प्रभावित हो सकता है. सुबह से ही बैक पहुंचने वाले ग्राहकों को ताला लटका हुआ मिला. अब देखना होगा की सरकार बैंक यूनियन की मांगे मानती है या नही|


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