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मकर संक्रांति के दिन से होती है बड़े दिनों की शुरुआत

14 जनवरी, आज के दिन देश भर में मनाया जा रहा संक्रांति का त्यौहार. लाखों लोग लगाऐंगे गंगासागर में डुबकी


मकर संक्रांति देश भर में हर जगह किसी न किसी रुप में मनाया जाता है. तमिलनाड़ू में पोंगल तो पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी देश के हर प्रांत में अलग-अलग मान्याताओं के साथ इस दिन को त्यौहार कि रूप में मनाया जाता है. पौष मास में जिस दिन सूर्य मकर राशि पर प्रवेश करता उसी दिन को मकर संक्रांति के रूप में मनाते हैं. इसी दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्ररभ्भ होती है.

शास्त्रो के अनुसार दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि अर्थात नकारात्मकता तथा दिन को उत्तरायण अर्थात सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है.

अपको बता दें इस दिन को लाखों श्रद्धालू गंगासागर के तट में स्नान करते हैं तथा स्नान के बाद गंगातट पर ही कुछ दान भी करते है हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगासगर के स्नान को महास्नान कहा गया है. इसके अलावा दान देनें को भी अत्यंत शुभ माना गया है.

मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है जो भारत से अधिक दूर है. इसी कारण यहां पर रातें बड़ी तथा दिन छोटे होते हैं. लेकिन मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य का उत्तरी गोलार्ध में आना होता है जिसकारण से पुन; रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं


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