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VIP कल्चर और ...

गणतंत्र है लेकिन “गण” पीछे काहे भाई


देखिये नीचे लिखा पढ़िए मगर (कुछ लोग) गुस्सा मत होइएगा और अगर गुस्सा हो भी जाइएगा तो इतना की मनाया जा सके. दरअसल बात ये है की गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वैसे तो हर बार नीचे लिखी बात देखने को मिलती है पर इस बार थोडा गहराई से सोचने के बाद लगा अब लिखना चाहिए .

पिछले कुछ दिनों से VIP कल्चर,सुरक्षा कारणों से,लाल बत्ती जैसे शब्द चर्चा में रहे और इस बीच लाल बत्ती मंत्रियों(नेता जी) को त्याग भी करना पड़ा.पंजाब में त्याग और VIP कल्चर ख़त्म करने की वकालत उतरप्रदेश,केंद्र और कई जगह शुरू हुई, कुल मिलाकर भौकाल ख़त्म करने की दिशा में कदम बढ़ने की बात हुई.

अब सीधे मुद्दे पर आते हैं चुनाव के समय हमेशा नेताओं के मुह से सुनते हैं ये आप की सरकार है लोकतंत्र में पहला हक जनता का है,जनता सबसे पहले फिर पार्टी फिर सरकार.बात सही है की गणतंत्र का मतलब जनता का तंत्र(माने जनता), आम आदमी का तंत्र लोकतंत्र में पहला हक़ जनता का फिर राजपथ में पहली पंक्ति,दूसरी पंक्ति और न जाने कौन-कौन सी पंक्ति VIP, नेता,मंत्री के लिए अरक्षित की जाती हैं.गणतंत्र में पहला स्थान आम नागरिक को दिया जाना चाहिए ऐसा मन जाता है लेकिन चाहे कितनी भी बात हो जाये लेकिन स्थिति ये है की पहला स्थान मंत्री,VIP, नेता अफसर को ही दिया जाता है.उसके बाद ही जनता को स्थान मिलता है और हवाला दिया जाता है प्रोटोकॉल, सुरक्षा की दृष्टिकोण से. नेता जी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र जैसे अवसरों पर लेट आते हैं फिर भी पहले स्थान पर बैठते हैं ये तो वैसे चीटिंग हुई (स्कूल में जो पहले आता था वही आगे बैठता था) .

दिल्ली से लेकर राज्य की राजधानी तक यही हाल है और तो और जिला मुख्यालय भी इससे अछूते नही है. देश के सम्मान में देश की आजादी के जश्न में  लोकतंत्र (जनता के तन्त्र) की भूमिका और महत्तवता पहले होती है लेकिन हमारे देश के नेताओं की सुरक्षा,VIP कल्चर के कारण आम आदमी हमेशा 4 या 5 पंक्ति के बाद ही कहीं स्थान मिलता होगा. बात यहाँ किसी की सुरक्षा की कोताही की नहीं है पर आज भी आम आदमी अंतिम पंक्तियों से सिर्फ झांकता हुआ ही दिख रहा है. VIP कल्चर ने आम आदमी को यह सोचने पर मजबूर किया है की और ये बात अब जनता के दिमाग में अच्छे से बैठ चुकी है की ये लाव लश्कर नेताओं से छूटता नहीं है, नेता जी बात भले करें की मै तो जनता का प्रतिनिधि हूँ, मै जमीन से जुड़ा हुआ हूँ लेकिन इन्हें सुरक्षा घेरे में चलना,सबसे पहली पंक्ति में बैठना और विलासिता की सारी सुविधाओं के लिए आतुर रहते हैं .नेता किसी दल के हों चाहे वो सत्ता पक्ष का या विपक्ष का भौकाल की भूंख तो रहती ही है (नोट-कुछ नेताओं को छोड़कर) .


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