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Wednesday 31st of January 2018 | कमजोर विपक्ष और ....

कमजोर विपक्ष में जनता के हाँथ सिर्फ हताशा


जनता किसी भी सरकार को सत्ता से तभी हटाती है जब वो रोजगार, किसान, गरीब, आम जनता के मुद्दों से इतर जुमलेबाजी और वादा खिलाफी की ओर बढ़ जाती है. केंद्र में बीजेपी को बहुमत मिला जनता द्वारा कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ कर विपक्ष में बैठा दिया गया और साफ़-साफ़ कहा गया की आप सरकार में नहीं विपक्ष में बैठकर जनता की लड़ाई लड़ने का काम करें. विपक्ष में बैठना भी एक जिमेम्दारी है 2014 में नरेंद्र मोदी को देश की कमान के साथ कांग्रेस को जनता ने अप्रत्यक्ष रूप से एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी थी विपक्ष की जिम्मेदारी.

विकास पर केन्द्रित नरेंद्र मोदी सरकार ने कितना कारगर काम किया इस पर जनता चुनाव में अपना मत देकर रुख साफ़ कर देगी .आज एक महत्वपूर्ण सवाल विपक्ष की भूमिका का है क्या विपक्ष जनता द्वारा दी गयी जिम्मेदारी को पूरा करने में सफल हुई .अगर सरकार के कार्यों का मूल्यांकन जरुरी है तो विपक्ष के लिए जनता द्वारा चुने जनप्रतिनिधियों के भी कार्यों का मूल्यांकन जरुरी है. सिर्फ सरकार को तानाशाह कह देने से काम नहीं चलेगा.

जब विपक्ष में बीजेपी थी –

2004 से 2014 तक विपक्ष में बीजेपी और उनके सहयोगी थे लेकिन विपक्ष में रहते हुए बीजेपी ने बखूबी जिम्मेदारी का निर्वहन किया.जनता,किसान,युवा,रोजगार के मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनती रही. बीजेपी ने विपक्ष में बैठना सदैव जनता द्वार दी गयी जिम्मेदारी के रूप में लिया .

मुद्दों में विपक्ष-

 किसान आत्मत्या, ऋण माफ़ी, नोटबंदी, आतंकवाद, महगाई जैसे मुद्दों पर अगर सरकार विफल रही तो विपक्ष भी मुद्दों को उठाने में असफल रहा .सरकार की जनविरोधी नीतियों को लेकर जमीन स्तर पर उतरने में कांग्रेस और विपक्ष में बैठे सहयोगी फेल हुए.आप को भी याद होगा की विपक्ष में रहते हुए बीजेपी ने महगाई के विरोध में संसद मार्च कर साइकिल यात्रा और सदन में जमकर सरकार को घेरा था लेकिन यहाँ तो कांग्रेस अब तक नव निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष की ब्रांडिंग में ही लगी है अरे ब्रांडिंग होगी लेकिन तब जब जनता के मुद्दों को जनता के साथ बैठकर सरकार के खिलाफ लामबंद होगे तब. आज कमजोर विपक्ष के कारण जनता भी यह सोच रही होगी की मुद्दों और जनहित की लड़ाई किसके हाँथ में सौंप दी.

आज विपक्ष भ्रमित है न जाने किस ओर जा रहा है.महगाई,बेरोजगारी,किसानों के मुद्दे पर जनता सिर्फ विपक्ष का मुह ताक रही है. विपक्ष का सिर्फ भाषण दे देना काफी नहीं बल्कि जमीनी स्तर से लड़ाई लड़ना होगा अब जनता सरकार के साथ-साथ विपक्ष के भी काम का मूल्यांकन करेगी.


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