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Tuesday 6th of February 2018 | क्या होगा अगर एक साथ हों लोकसभा और विधानसभा चुनाव ??

क्या होगा अगर एक साथ हों लोकसभा और विधानसभा चुनाव ??


 

लम्बे समय से इस बात पर चल डिबेट चल रही है की देश में लोकसभा और राज्यों की विधानसभा के चुनाव एक साथ किये जाएँ , यानी ‘एक राष्ट्र ,एक चुनाव !, इस बात को और हवा तब मिली जब लोकसभा और राज्यसभा के जॉइंट हाउसेस को एड्रेस करते हुए भारत के राष्ट्रपति माननीय रामनाथ कोविंद ने इस सम्बन्ध में कहा की देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराये जाने पर विचार किया जाए , इससे देश की सम्पदा की बचत होगी और बार बार होने वाले चुनावो के बीच फसने वाले विकास कार्य को मुक्ति मिलेगी , बार बार होने वाली चुनावी  प्रकिया जनता को भी थका देने करने वाली है   

आइये देखते हैं क्या होगा अगर दोनों बड़े चुनाव साथ किये जाएँ ?

फ़ायदे:-

  • देश की राष्ट्रीय कोष की बचत होगी
  • बार बार मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट से होने वाले अवरोधों से बचा जा सकेगा, बहुत सारी स्कीम्स इसके कारण डिले हो जाती हैं
  • चुनाव आयोग का काम आसान हो जायेगा, पैसे की बचत होगी
  • राज्य और देश की सरकारों की जबावदेही तय होगी
  • चुनाव आयोग को एक वोटर लिस्ट जारी करना होगा, अभी हर चुनाव के अलग अलग लिस्ट जारी होते हैं  
  • लोकसभा के बीच होने वाले विसचुनावो में सम्बंधित राज्यों से लोक लुभावने वादे नही किये जा सकेंगे
  • देश और राज्य की सरकारों में स्थिरता आएगी
  • चुनावी भ्रष्टाचार कम होंगे
  • बार बार होने वाले चुनावों के लिए बड़े पैमाने पर शिक्षकों की ड्यूटी लगाईं जाती है जिससे , जिससे अध्यापन कार्य प्रभावित होता है , इसे मैनेज किया जा सकेगा .

कुछ नुकसान:-

  • बड़ी पार्टियों का प्रभुत्व बढेगा , क्षेत्रीय पार्टिया कमजोर होंगी जो लोकतंत्र के लिए ठीक नही है
  • इनमे आपस में मतभेद बढेगा
  • कभी कभी लहर में लोग एक ही पार्टी को वोट करेंगे , जिससे राज्य हित प्रभावित होंगे , देश में एक ही पार्टी का शासन हो सकता है
  • नए सिरे से चुनाव करने से कुछ विधान सभाओ को भंग करना पड़ेगा , कुछ विधान सभाओं का कार्यकाल बढ़ाना पडेगा.

हालाकि कुल मिला के देखा जाय तो देश में साथ चुनाव कराने से फायदा ज्यादा नज़र आता है , इस बात की पहली सिफारिश लॉ कमीशन द्वारा १९९९ में लोकसभा के सामने रखी गयी थी, 17 दिसंबर,2015 को पार्लियामेंट की स्टैंडिंग कमेटी की 79वीं रिपोर्ट में कहा कि अगर ये नियम लागू हुआ तो बहुत से सांगठनिक बदलाव करने होंगे. इसके लिए आर्टिकल 83, 172, 85, 174 में संशोधन करना होगा.

 

 


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