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Sunday 4th of March 2018 | अर्जुन सिंह :- एक राजनैतिक पुरोधा

कुंवर अर्जुन सिंह,विन्ध्य सपूत


विन्ध्य क्षेत्र की राजनीति का सबसे बड़ा और सफल नाम कुवर अर्जुन सिंह , जन्म मध्यप्रदेश के सीधी जिले के चुरहट में 5 नवम्बर 1930 को जागीर घराने में हुआ, राजनीति का कद इतना बड़ा कि 3 दफे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री , पंजाब राज्य के राज्यपाल, नरसिंहाराव और मनमोहन सिंह सरकार के केंद्रीय मंत्री, एवं ताउम्र केंद्र की सक्रिय राजनीति में रहे, भारतीय राजनीति में आज भी कुवर अर्जुन सिंह का नाम बड़े ही अदब के साथ लिया जाता है.

राजनीति का सफ़र शुरू करने का किस्सा बड़ा ही दिलचस्प है

राजनीति की शुरुआत उन्होंने अपने आत्म स्वाभिमान की रक्षा के लिए थी, उन्होंने ने हमेशा ही चुनौतिया स्वीकार करना सीखा था, इसकी चिंता किये बगैर की वह चुनौती कितनी बड़ी है ? दरअसल वर्ष 1952 में तत्कालीन विन्ध्यप्रदेश के चुरहट में पंडित जवाहर लाल नेहरु चुनाव प्रचार करने पहुचे थे , जहाँ मंच से उनके द्वारा अर्जुन सिंह के पिता राव शिबहादुर सिंह को कांग्रेस का प्रत्याशी घोषित किया गया , मगर रीवा पहुँच कर उन्होंने एक और घोषणा की चुरहट से मेरी पार्टी का कोई प्रत्याशी नही है ... इसके बाद राव शिबहादुर सिंह निर्दलीय चुनाव लडे और हार गए , यह बात उस समय नौजवान अर्जुन सिंह को चुभ गयी, और वर्ष 1957 का अगला चुनाव अर्जुन सिंह ने लड़ा और कांग्रेस के दंभ को तोड़ते हुए जीत भी लिया , इस तरह उनकी राजनीति की लम्बी पारी की शुरुआत हुई

इसके बाद कई दौर आये , चुनौतियां आई मगर कभी पीछे मुड़ कर नही देखा, एक सच्चे योद्धा की तरह फतह दर फतह आगे बढ़ते रहे.

जब समर्थकों से कहा जिंदा रहे तो जल्द आपके बीच आऊंगा-

बात तब की है जब पंजाब प्रान्त की परिस्थितियाँ बहुत खराब थीं आतंकवाद फैला हुआ था , और हालत नियंत्रण से बाहर थे तब केंद्र सरकार द्वारा अर्जुन सिंह को परास्त करने की योजना से उन्हें पंजाब का राज्यपाल नियुक्त किया गया. सब जानते हुए भी अर्जुनसिंह के माथे में शिकन तक नही थी ..सीधी से पंजाब जाते हुए उमड़े जनसैलाब को यही कहा की “ज़िंदा रहे तो जल्द आपके बीच आऊंगा” लोग भावुक हो उठे थे.

हलाकि बाद में उन्हेंने हालत को संभालते हुए वहां की परिस्थितियों को सामान्य कर दिया था जो उनकी बेजोड़ और कुशल रणनीति का उदहारण है.

अर्जुन सिंह केवल एक राजनेता नही थे बल्कि एक कुशल रणनीतिकार थे, मात्र अपने क्षेत्र से नही बल्कि जहाँ गए वही चुनाव जीता ,भारतीय राजनीति में आज भी कुवर साहब को दलित , शोषित ,अल्पसंख्यक और पिछडा वर्ग के संघर्ष और आरक्षण की आवाज उठाने वाले राजनेता के रूप में याद किया जाता है.

लेखक-अभिषेक तिवारी (विन्ध्य टाइम्स)


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