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Monday 5th of March 2018 | विशेष: हैप्पी बड्डे मामा

जब सीएम को पहचान नहीं पाए थे उनके कार्यकर्ता


vt special : आज मामा का बड्डे है. सियासत समाज राजनैतिक प्रतिस्पर्धा और अन्य सभी विमर्शों के बीच सोचा की आज प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर कुछ लिखा जाए और लिखा इसलिए भी जाए क्युकी आज उनका जन्मदिन है और प्रदेश के मुखिया भी हैं . आरोप-प्रत्यारोप, राजनीति से इतर आज प्रदेश के मुखिया बच्चों के मामा के जन्मदिन पर विशेष .

शिवराज सरकार को आज 13 साल पूरे होने को हैं मतलब यह की प्रदेश के मुखिया के रुप में शिवराज सिंह चौहान ने लगातार 13 साल काम किये हैं. हालाकि इससे पहले भी शिवराज सिंह चौहान(मामा)  पार्टी के कई महत्वपूर्ण दायित्वों को निभा चुके हैं, जिसमें से वो कई बार विधायक तथा सांसद भी रह चुके हैं. इसके अलावा शिवराज सिंह चौहान भारतीय जनता युवा मोर्चा से राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा भाजपा पार्टी से प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं.

सन 2005 में बाबूलाल गौर के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रुप में शिवराज सिंह चौहान ने अपनी राजनीति की नयी पारी की शुरुआत की जिसपर सभी विधायकों के सर्वसम्मति से उन्होने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.जिसके बाद लगातार उन्होने प्रदेश की जनता के लिए काम करना जारी रखा और प्रदेश की जनता से उनका स्नेह बढ़ता गया जिसपर जनता ने 2008 तथा 2013 में भी शिवराज सिंह चौहान पर ही भरोसा जताकर उन्हे मुख्यामंत्री बनाया.

9 वर्ष की उम्र में निकाला था जुलूस-

शिवराज सिंह की उम्र महज 9 वर्ष की थी जब उन्होंने मजदूरों की रैली निकाल कर नर्मदा तट पर बूढ़े बाबा के चबूतरे पर ग्रामीण मजदूरों को इकट्ठा किया और बोले 2 गुना मजदूरी मिलने तक काम बंद कर दो.मजदूरों का जुलूस लिए शिवराज सिंह गाँव में घूम रहे थे.

जन कार्यकर्त्ता नहीं पहचान पाए शिवराज सिंह को –

आपको बता दें शिवराज सिंह चौहान ने पार्टी के अंदर शुरु से ही आम कार्यकर्ता के रुप में काम करना प्रारंभ किया. जिसके चलते कई बार तो ऐसा भी हुआ की उनके कार्यकर्ताओं ने तो खुद ही उन्हे नहीं पहचाना. एक घटना के बारे में हम आपको बताते हैं कि जब शिवराज सिंह चौहान सन 1990 के आसपास भारतीय जनता युवा मोर्चा से प्रदेश अध्यक्ष बने तब अचानक ही पार्टी के द्वारा किसी अहम बैठक के चलते उन्हे भोपाल भेजा गया (यहां पर हम आपको बताते चलें तब छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में ही आता था और शिवराज सिंह का मुख्यालय रायपुर था) जिसके कारण जब वह बैठक लेने भोपाल पहुंचे तो उनके स्वागत के लिए पहले से ही वहां पर कार्यकर्ता मौजूद थे लेकिन फिर भी जब वह बस स्टाप पर बस से उतरे तो कोई भी कार्यकर्ता उन्हे पहचान ना सका जिसपर बाद में शिवराज सिंह ने ही उन कार्यकर्ताओं को बताया कि मैं ही हूं आपका प्रदेश अध्यक्ष जिसकी तलाश में आप लोग यहां पर खड़े हो  तब फिर कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया.

 


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