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पार्टी को कोई नुकसान नहीं :जनार्दन मिश्रा

पार्टी छोड़ते ही अभय पर सांसद का तीखा वार


अभय मिश्रा ने कल बीजेपी से इस्तीफा देकर कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ले ली.दिल्ली में मप्र. कांग्रेस प्रभारी दीपक बावरिया,प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव,वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ की मौजूदगी में रीवा जिला पंचायत अध्यक्ष का कांग्रेस में प्रवेश हुआ. अभय मिश्रा ने राहुल गाँधी को पत्र लिखकर कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ली एवं उसके तुरंत बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार चौहान को पार्टी में उपेक्षा और आरोपों से भरा पत्र लिखकर अपना इस्तीफा सौंप दिया. अभय मिश्रा ने कहा की बीजेपी और सत्ता बस एक ही व्यक्ति की बंधुआ मजदूर बनकर रह गयी है .कांग्रेस प्रवेश की खबर के साथ ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया.सोशल मीडिया से लेकर मीडिया में बयानबाजी शुरू हो गयी .

कांग्रेस में चुनावी साल में आये नेताओं का हाल-

विन्ध्य में चुनावी साल में कांग्रेस ज्वाइन करने वालों से कांग्रेस सेवा और समर्पण चाहती है .पिछले 14 साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस को पार्टी के साथ आज भी खड़े सिपाहियों की चिंता रहती है तभी तो पूर्व में मंत्री राजेंद्र शुक्ला के भाई विनोद शुक्ला को कांग्रेस में लाया गया और बाद में क्या हुआ पिछला चुनाव देख सकते हैं आप. महाराजा पुष्पराज सिंह 2013 में कांग्रेस से लगभग फाइनल हो चुके थे बाकायदा कार्यालय खोलकर प्रचार-प्रसार भी शुरू कर दिया था क्या हुआ अंतिम वक्त में टिकिट कहीं और चली गयी. कांग्रेस में अपनी जमीन तलाशते दिव्यराज को भी कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामना पड़ा था .

बिना शर्तों के कांग्रेस में –

कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता के साथ यह भी पत्र में स्पष्ट हो चुका है की वह बिना किसी शर्तों के पार्टी में आये हैं .पूर्व मंत्री राजमणि पटेल ने कहा की अभय मिश्रा बीजेपी के कुशासन ने आहात होकर कांग्रेस में आये हैं और वह बिना किसी शर्तों के कांग्रेस में शामिल हुए हैं.

पहले निष्कासन फिर खुद इस्तीफा –

27 अक्टूबर 2015 को अभय मिश्रा को बीजेपी ने 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया था. बाद में उन्हें पुनः पार्टी में शामिल कर लिया गया था. यह उठा पटक बहुत दिन से चल रही थी और इस बार वो खुद कांग्रेस में शामिल हो गये.सूत्र तो यह भी बताते हैं की बीजेपी ने अभय मिश्रा के खिलाफ कार्यवाही करने का मन बना लिया था लेकिन बीजेपी की कार्यवाही के पहले ही वो आनन-फानन में दिल्ली जाकर सदस्यता ग्रहण कर लिए.

अभय मिश्रा के बीजेपी छोड़कर जाने को लेकर विन्ध्या टाइम्स ने रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा से बात की तो उन्होंने कहा की – अभय मिश्रा के जाने से पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा,ऐसे लोगों का बीजेपी से चले जाना पार्टी हित में ही है.अभय मिश्रा जैसे लोग सिर्फ लोगों के बीच ब्लैकमेलिंग का काम करते हैं.

जनार्दन मिश्रा संसद रीवा-

मप्र. कांग्रेस के उपाध्यक्ष  पूर्व सांसद और गुढ़ से विधायक सुन्दरलाल तिवारी ने अभय मिश्रा के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर तो पहले उन्हें जानकारी ही नहीं थी .बाद में जानकारी होने के बाद उन्होंने कहा शीर्ष नेतृत्व ने शामिल करवाया है.सवाल शीर्ष नेतृत्व से पूछा जाना चाहिए खैर शीर्ष नेतृत्व ने शामिल करवाया है तो सोच-समझकर ही किया है.

सुन्दरलाल तिवारी विधायक गुढ़

इसी साल के अंत में म.प्र. विधानसभा के चुनाव होने वाले है, और इस चुनावी साल में बहुत से नेता अपनी राजनैतिक वजूद और ज़मीन की तलाश में अपना पाला बदलेंगे , मगर क्या ये नेता जाने वाले दल की मूल विचारधारा और  भावनाओं के साथ न्याय कर पायेंगे ? या ये महज स्वयं के राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए ऐन मौकों पर पार्टियाँ छोड़ते पकड़ते रहेंगे. और अब एक बड़ा सवाल उन पार्टी नेताओं कार्यकर्ताओं का क्या जो आज भी विपरीत परिस्थितिओं में पार्टी का झंडा लिए खड़े हुए हैं . आज लोकतंत्र में सवाल चुनाव चिन्ह (पार्टी सिम्बल) का नहीं अपितु एक व्यक्ति की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं का है .पार्टी का मूल,विचार इतिहास कहीं सिर्फ किताबों और चुनावी घोषणापत्र तक ही सीमित न रह जाए.  


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